केंद्र सरकार से खुटहन में एम्स की रजामंदी के बाद कागजों में तैयारियों को लेकर भले ही तेजी शुरू हो गई है मगर इसे जमीन पर लाने के लिए सभी को कोर्ट के फैसले का इंतजार है। दरअसल एम्स के लिए प्रस्तावित जमीन के मामले में हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित है। उधर निर्माण कार्य में देरी न हो इसलिए राज्य सरकार ने अपने तभी तैयारियां पूरी रखने का निर्णय लिया है। फोरलेन का टेंडर भी इसी क्रम में जारी किया गया है।
चूंकि टेंडर की प्रक्रिया दो माह में पूरी होती है लिहाजा पहले ही लोक निर्माण विभाग ने इसे जारी कर दिया मगर आवेदन की बिक्री और टेंडर जमा करने के काम पर रोक है। जबतक कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता इस कागजी टेंडर की अवधि बढ़ाती रहेगी।
फोरलेन को लेकर मचे घमासान के बीच 25 अप्रैल को लखनऊ में प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा के साथ जिलाधिकारी और लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता की बैठक हुई। जिसमें प्रमुख सचिव ने खुटहन की जमीन के संबंध में जिलाधिकारी से जानकारी मांगी। उन्हें बताया गया कि मार्च में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी। निर्णय सुरक्षित है। इस पर प्रमुख सचिव ने कहा कि वकील से बात कर उसका जल्द निस्तारण कराएं। वहीं अधिशासी अभियंता ने बताया कि आठ किलो मीटर लंबी फोरलेन के लिए त्वरित विकास योजना से इस्टीमेट बनाकर भेजा गया है। वित्त विभाग से उसका अनुमोदन भी हो गया। उसका कुल बजट 152 करोड़ का है, जिसमें से 90 करोड़ रुपये से किसानों को जमीनों का मुआवजे का भुगतान किए जाएंगे।
फोरलेन पर 20 हजार से कम ‘ पीसीयू’ में उस रोड पर कितनी गाड़ियां चलेंगी उसके भार का आकलन होता है। 20 हजार से कम पीसीयू पर उसको कैबिनेट में मंजूरी को भेज दिया जाता है। यहां भी फोरलेन का मामला कैबिनेट में भेजा गया है। वहां से अनुमोदित होने के बाद उसे नियोजन विभाग में भेजा जाएगा। प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा ने अधिशासी अभियंता से पूछा कि कितने दिन में सड़क का कार्य पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि एक साल का समय लग जाएगा। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कम समय में पूरा करने की बात कही। तब छह माह में पूरा करने का आश्वासन दिया।
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सड़क निर्माण टेंडर प्रक्रिया में दो माह लग जाएंगे इस नाते टेंडर निकाल दिए हैं, पर टेंडर तभी पड़ेगा जब शासन की तरफ से जीओ जारी कर दिया जाएगा या जमीन का मामला क्लियर हो जाएगा तभी कार्य शुरू होगा।
एके सिंह अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड