सदर तहसील के खुटहन में ही एम्स निर्माण को केंद्र की सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद जिला प्रशासन ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। इसी क्रम में एम्स तक फ ोरलेन ले जाने और तीन तरफ से फ ोरलेन को जोड़ने वाले रास्ते के लिए जमीन का बंदोबस्त करने में प्रशासन जुट गया है। एसडीएम और तहसीलदार सदर के साथ ही राजस्व अधिकारियों और पीडब्लूडी के अफ सरों के साथ डीएम ओएन सिंह ने खुटहन में एम्स के लिए प्रस्तावित जमीन का निरीक्षण किया।
मौके पर घंटेे भर की मंथन के बाद पाया गया कि गोरखपुर-महराजगंज मार्ग को फोरलेन बनाने में तो विशेष दिक्कत नहीं आएगी मगर मुख्य मार्ग से गांव तक फोरलेन ले जाने के लिए जरूरी जमीन का इंतजाम करना आसान नहीं होगा। इसी के मद्देनजर डीएम ने गुरुवार की सुबह 11 बजे राजस्व, पीडब्लूडी और भू-अध्याप्ति दफ्तर के अफसरों की मीटिंग बुलाई है ।
प्रशासन भी यह मान रहा है कि गांव में जिन-जिन काश्तकारों की जमीन से फोरलेन गुजरेगा, उनसे जमीन हासिल करना आसान नहीं होगा। केंद्र सरकार की तरफ से खुटहन में एम्स को हरी झंडी मिलने के बाद जहां भू-माफिया आस-पास की जमीन लेने में जुट गए हैं वहीं गांव वालों को भी अपनी जमीन की कीमत का अंदाजा हो गया है। ऐसे में फोरलने के लिए निश्चित तौर पर वे अपनी जमीन का ऊंचा दाम लगाएंगे।
सूत्रों के मुताबिक डीएम ने पीडब्लूडी के मुख्य अभियंता को डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने का निर्देश दिया है ताकि शासन से मांगे जाने पर तत्काल उसे भेजा जा सके। बता दें कि हाल ही में केंद्र की तरफ से खुटहन में एम्स को सैद्धांतिक सहमति मिलने के पहले ही प्रदेश सरकार ने फोरलेन के लिए करीब 151 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर रखा है।
केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद अब प्रशासन ने कोर्ट में भी पैरवी तेज कर दी है ताकि एम्स की जमीन को लेकर हाईकोर्ट में दायर याचिका के संबंध में कोर्ट द्वारा सुरक्षित फैसला जल्द सुनाया जा सके।