मशहूर हास्य अभिनेता राजपाल यादव सियासत में नई इबारत लिखने का ख्वाब लिए नई पहचान गढ़ने को बेताब हैं। रविवार को वह एक कार्यक्रम के सिलसिले में शहर पहुंचे तो ‘अमर उजाला’ दफ्तर भी आए। यहां उन्होंनें सियासत और अभिनय दोनों विषयों पर खुलकर बातें कीं। पेश है संवाददाता आशुतोष मिश्र के साथ राजपाल यादव से हुई बातचीत के प्रमुख अंश।
राजनीति को ‘नीति राज’ में बदलने की कोशिश
राजनीति की वर्तमान दशा हर किसी को कचोटती है, लेकिन बदलाव के लिए लोग आगे आने को तैयार नहीं। विवाद नहीं आज संवाद की राजनीति की जरूरत है। बड़े भाई श्रीपाल यादव की सर्व समभाव पार्टी का स्टार प्रचारक बनकर अभिनय से राजनीति में प्रवेश कर चुके राजपाल ने ये बातें कहीं। हर नागरिक का आह्वान करते हुए बोले कि अपनी जिम्मेदारियों से राजनीति को अलग न करें। इसी क्रम में बताया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी करीब 390 सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगी।
राजपाल इसे राजनीति को ‘नीति राज’ में बदलने की कोशिश करार देते हैं। कहते हैं कि बीजेपी के प्रत्याशियों की घोषणा के बाद उनके उम्मीदवार घोषित होंगे। सुपात्र उम्मीदवार की तलाश चल रही है। यूपी के साथ अन्य राज्यों में हो रहे चुनाव में भागीदारी की बाबत पूछने पर राजपाल ने अभी पूरा फोकस यूपी पर बताया। हालांकि, अगली तैयारी के तौर पर 2018 में मध्य प्रदेश और 2019 में लोकसभा में शिरकत करने की बात कही। राजपाल ने प्रदेश के निर्माण को अपना मैनीफेस्टो बताया। कहा कि विकास अगर पेड़ है तो निर्माण जड़। वर्तमान में जड़ खोखली होने से विकास कारगर होता नहीं दिख रहा है।
उन्होंने गांव-गिरांव तक इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने पर जोर दिया। कहा कि बॉलीवुड की पहचान हिंदी फिल्मों से है, लेकिन हिंदी भाषी क्षेत्र में कोई फिल्म सिटी नहीं है। पार्टी सत्ता में आएगी तो गंगा या यमुना के किनारे तीन हजार एकड़ में फिल्म सिटी का निर्माण होगा। इससे तीन लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। अन्य दलों के मुकाबले में कमजोर संगठन को लेकर कहा कि चुनाव में पुरानी पार्टियों में अक्सर संगठन और पार्टी प्रत्याशी में ठन जाती है, ऐसे में अभी पूरा जोर सेना जुटाने पर है। चुनाव के बाद संगठन पर काम होगा। बताया कि परिवार से केवल छोटे भाई राजेश यादव शाहजहांपुर की तिलहर विधानसभा सीट से चुनाव में उतरेंगे।
हास्य नहीं कैरीकेचर पेश कर रहे कॉमेडी शो
मशहूर हास्य अभिनेता राजपाल यादव ने टीवी पर कॉमेडी शो की भरमार के बीच कॉमेडी का अभाव बताया। कहा, टीवी शो में कॉमेेडी के नाम पर कैरीकेचर पेश किया जा रहा है। अगर हास्य कार्यक्रम को परिवार के साथ देखने या सुनने में दिक्कत हो तो वह कॉमेडी नहीं। कॉमेडी में फूहड़ता नहीं बल्कि स्टैंडर्ड होना चाहिए। दिवंगत अभिनेता ओमपुरी को याद करते हुए उन्होंने फिल्म ‘चाची 420’ का जिक्र किया। बेहद सहजता के साथ ओमपुरी की बेहतरीन कामेडी को हास्य अभिनेताओं के लिए सबक बताया।
ओमपुरी के निधन को सिनेमा के लिए अपूरणीय क्षति करार देते हुए कहा कि वह जिस उम्र में थे उस दौर में कलाकार जवान होता है। उनसे अभी दो-चार ऐसे रोल की उम्मीद थी जिसे पूरी दुनियां याद करती। उनमें वह प्रतिभा भी थी, लेकिन उन्हें इसका वक्त नहीं मिला। एक कलाकार के साथ बेहतरीन इंसान बताते हुए राजपाल ने ओमपुरी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। राजपाल वर्तमान में अभिनय जगत में गलोबलाइजेशन से आया बदलाव देखते हैं। कहते हैं कि आज कोई लीडिंग या सपोर्टिंग एक्टर नहीं बल्कि सभी इंटरटेनर हो गए हैं। असली हीरो कंटेंट है। उन्होंने नए हास्य कलाकारों को नसीहत दी कि कॉमेडी को छोटा न करें। हंसाना अच्छा है लेकिन स्तर गिराकर हंसाने की कोशिश कला के साथ अन्याय है। बोले, टीवी में ऐसा ही चल रहा है। इसलिए तमाम ऑफर के बाद भी उन्होंने एक को भी नहीं स्वीकारा।
अपनी सबसे यादगार भूमिका पूछने पर उन्होंने ‘मैं, मेरी पत्नी और वो’ फिल्म में निभाए अपने किरदार को याद किया। नई फिल्म ‘रामरतन’ के मई तक आने की उम्मीद जताई और ‘ओंताय’ में निभा रहे चरित्र को बेहद शानदार बताया। कहा कि अब 300 स्क्रिप्ट सुनता हूं तो 10-12 चुनता हूं।