बॉलीवुड में अपने दमदार अभिनय से आम-ओ-खास में पहचान बना चुके मनोज जोशी ने सूबे के सीएम को चाणक्य की तरह फैसले लेने वाला बताया। मनोज दिव्य प्रेम सेवा मिशन के बुलावे पर नाटक ‘चाणक्य’ के मंचन के लिए शुक्रवार शाम शहर पहुंचे थे। शनिवार को एमपी इंटर कॉलेज मैदान में इसका मंचन होना है।
शहर के एक होटल में ‘अमर उजाला’ की मनोज जोशी से बात हुई। वर्तमान राजनीति में ‘चाणक्य’ से चरित्र के बारे में पूछा गया तो उन्होंने योगी आदित्यनाथ का नाम लिया। कहा कि सुबह न्यूज देखते वक्त योगी की बात सुनीं। वह महापुरुषों के नाम पर दी जा रही छुट्टियों को रद्द करने की बात कह रहे थे। महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर हमें उनके आदर्शों और जीवन से सीख लेने की कोशिश करनी चाहिए। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद से उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसले लिए।
मूल्यों का अवमूल्यन रोकने के लिए चाणक्य जरूरी
मनोज जोशी ने चाणक्य को व्यक्ति नहीं बल्कि आंदोलन करार दिया। कहा कि मध्यकाल में कही गई उनकी बातें आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा था कि कोई भी चीज स्वकेंद्री न हो। मूल्यों का अवमूल्यन रोकने के लिए चाणक्य जरूरी हैं।
मधुमक्खी की तरह सरकार ले टैक्स
मनोज जोशी ने कहा कि चाणक्य ने टैक्स को लेकर भी सुझाव दिया था। कर के लिए सुझाया था कि मधुमक्खी फूल से शहद लेती है फिर भी पुष्प सूखता नहीं है, ऐसे ही सरकारों को जनता से टैक्स भी लेना चाहिए।
प्रजा के सुख में राजा की खुशी
नाटक चाणक्य के संवाद पर मनोज जोशी बोले कि जब भी इसका मंचन किया संवाद ताजा लगे। एक दृश्य में चाणक्य बोलते हैं कि राजा होना सुखी होने का मार्ग नहीं है। प्रजा के सुख में ही राजा का सुख है।
27 सालों से कर रहे हैं ‘चाणक्य’ का मंचन
मनोज ने बताया कि 1990 में पहली बार गुजराती में ‘चाणक्य’ का मंचन मुंबई में किया। सीएम रहते हुए मोदी ने हिंदी में इसके मंचन की प्रेरणा दी और 1001वें मंचन को देखने का वादा किया। 21 दिसंबर 2016 को उन्होंने वादा भी पूरा किया।
मिशन का उद्देश्य पवित्र
कुष्ठ रोगियों के साथ ही बेसहारा बच्चों के कल्याण के लिए काम कर रहे दिव्य प्रेम सेवा मिशन के उद्देश्य को पवित्र बताते हुए मनोज ने खुद को इसका हिस्सा बताया। कहा कि 21 हजार परिवारों को अपने साथ जोड़ने के मिशन के लक्ष्य को पूरा करने गोरखपुर आए हैं।