नोटबंदी की मार के बीच तीन दिन में ही 100 करोड़ की कमाई करने वाली फिल्म दंगल भले ही शहर में दांव मार ले गई हो मगर कस्बों में इसके दांवपेंच दर्शकों को बाक्स आफिस तक नहीं खींच पाए। सप्ताह भर में ही यह फिल्म शुक्रवार को पूर्वांचल के आधा दर्जन से अधिक सिनेमाहालों से उतर गई। गोरखपुर में जहां पीपीगंज के सिनेमाहाल से शुक्रवार को यह फिल्म निकल गई वहीं देवरिया के सलेमपुर, फतेहपुर, बलरामपुर के उतरौला, जौनपुर के मछलीशहर व मोंगरा बादशाहपुर, आजमगढ़ के मुबारकपुर समेत कई इलाकों के सिनेमाहाल मालिकों को यह फिल्म हटानी पड़ी।
नोटबंदी के 50वें दिन भी शहरों में भले ही थोड़े हालात सुधरे हों मगर ग्रामीण इलाकों में अब भी रुपये के लिए जद्दोजहद जारी है। सिर्फ गोरखपुर मंडल में ही पूर्वांचल बैंक की 225 शाखाएं अब भी बंद चल रही हैं। शहरों के मॉल में स्थित मल्टीप्लेक्स समेत कई दूसरे सिनेमाहाल में ऑनलाइन टिकट बुकिंग के साथ ही टिकट काउंटर पर स्वाइप मशीन आदि के विकल्प होने से शहरों में तो दंगल ने भारी कमाई की, मगर गांवों में यह फिल्म औंधे मुंह गिर गई। पहले सप्ताह में भी कस्बों के सिनेमाहाल मालिकों को इस फिल्म से अपेक्षा के मुताबिक कमाई नहीं हो सकी। यहीं नहीं, कई सिनेमाहाल मालिकों को तो नुकसान भी झेलना पड़ा। कुछ ने तो दंगल हटाकर भोजपुरी फिल्म लगा दी।
आमिर की फिल्मों से अच्छी कमाई की उम्मीद रहती है। जिस तरह से दंगल का प्रचार-प्रसार हुआ, फिल्म से कमाई की अपेक्षा भी काफी बढ़ गई थी। यही वजह है कि नोटबंदी के इस दौर में भी उम्मीद से ज्यादा रुपये खर्च कर फिल्म खरीदी गई, मगर पहले दिन ही सीटें फुल नहीं हुईं। इसके बाद तो हर शो में बचे हुए टिकटों की संख्या बढ़ती ही गई जिसके चलते मजबूरन फिल्म उतारनी पड़ी। शुक्रवार को भोजपुरी फिल्म धर्म के सौदागर लगाई।
- अजीत नायक, मालिक, ईश्वरी चित्र मंदिर सिनेमाहाल पीपीगंज
गांवों, कस्बों में अब भी लोगों को जरूरत भर की रकम नहीं मिल पाई है। ऐसे में खाद-बीज और दूसरी जरूरी आवश्यकताओं की पूर्ति लोगों की पहली प्राथमिकता है। शायद यही वजह है कि उम्मीद के मुताबिक सिनेमाहाल मालिकों को इस फिल्म से कमाई नहीं हो सकी। पूर्वांचल के आधा दर्जन से अधिक सिनेमाहाल मालिकों ने शुक्रवार को फिल्म उतार दी।
- सुनील भाटिया, डिस्ट्रीब्यूटर