सदर सांसद महंत आदित्यनाथ ने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार विकास योजनाओं में जानबूझकर बाधा खड़ी कर रही है। गोरखपुर-वाराणसी राजमार्ग का फ ोरलेन निर्माण, गोरखपुर फ ोरलेन बाईपास के लिए भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई में किए जा रहे विलंब इसको बयां करता है।
उन्होंने कहा कि गोरखपुर से वाराणसी फ ोरलेन के लिए भारत सरकार ने 2700 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। आठ सितंबर को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इसका शिलान्यास भी किया। बावजूद इसके प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही से गोरखपुर में भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई की रफ्तार बहुत धीमी है। 92 गांवों में से अब तक 35 गांवों में भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई के लिए नोटिफिकेशन जारी हो पाया है और उसमें भी तीन से चार गांवों के ही किसानों में सिर्फ 10 करोड़ का मुआवजा वितरित किया गया है। जबकि भारत सरकार अब तक भूमि अधिग्रहण के मुआवजे के तौर पर 172 करोड़ रुपये दे चुकी है।
इसी तरह कालेसर से जंगल कौड़िया-गोरखपुर फ ोरलेन बाईपास में भी लापरवाही बरती जा रही है। इस सड़क की लागत 535 करोड़ है और इसके लिए 23 गांवों के किसानों की भूमि अधिग्रहण होनी है। डेढ़ साल में सिर्फ नौ गांवों में ही कार्रवाई शुरू हो सकी। मुआवजे के लिए भारत सरकार जिले को 101 करोड़ रुपये पहले ही दे चुकी है। महंत ने प्रदेश सरकार को चेताया कि वह विकास की इन योजनाओं में राजनीति करने के बजाय प्राथमिकता के आधार पर अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हुए भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई में अपना सहयोग दें।