मृतक के पुत्र ने पिता के शव को कंधे पर उठाकर स्टेशन से बाहर लाया।
- फोटो : Amar Ujala
पिपराइच स्टेशन पर बुधवार को रेलवे की बड़ी लापरवाही सामने आई। इसके चलते इलाज के अभाव में एक यात्री की जान चली गई। संवेदनहीनता की हद तो तब पार हो गई जब सूचना के बाद भी आरपीएफ व जीआरपी के सिपाही नहीं पहुंचे और घरवालों को कंधे पर ही शव उठाकर ले जाना पड़ा। वहीं दो एक्सप्रेस व दो पैसेंजर ट्रेनों के खड़े होने से रेलवे क्रॉसिंग भी घंटों तक बंद रही। इससे क्रॉसिंग के दोनों तरफ लोग फंसे रहे।
पिपराइच प्रतिनिधि के मुताबिक बुधवार को दोपहर करीब सवा एक बजे कप्तानगंज से गोरखपुर जाने वाली सवारी गाड़ी (55055) को पिपराइच रेलवे स्टेशन पर रोक दिया गया। काफी देर तक जब ट्रेन नहीं चली तो यात्रियों ने स्टेशन मास्टर आरएन प्रसाद से इसकी जानकारी ली। स्टेशन मास्टर ने बताया कि उनौला स्टेशन पर ट्रेन को सिग्नल नहीं दिया जा रहा है। इसी ट्रेन में इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज जा रहे रामकोला के सिधावट खास गांव के हरी गुप्ता (55) की तबीयत बिगड़ गई और उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके बेटे मुकेश ने बताया कि स्टेशन मास्टर को सूचना देकर एंबुलेंस मंगाने का अनुरोध किया गया था, मगर आधे घंटे तक एंबुलेंस नहीं आई और न ही आरपीएफ, जीआरपी के सिपाही पहुंचे।
उधर, स्टेशन मास्टर का कहना है कि सूचना दी गई थी, एंबुलेंस थोड़ी देरी से पहुंची। जाम हटाकर शव को घर तक भिजवा दिया गया। एनईआर के सीपीआरओ संजय यादव ने कहा कि इस मामले की जांच कराई जाएगी। ट्रेनों को रोकने की वजह का पता लगाया जाएगा और किसी के दोषी मिलने पर उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सत्याग्रह व अवध भी फंसी रही
पैसेंजर ट्रेन के खड़े होने से करीब आधे घंटे बाद दिल्ली से रक्सौल जाने वाली सत्याग्रह एक्सप्रेस (5273) के आने की सूचना मिली, लेकिन स्टेशन पहुंचने के पहले ही यात्रियों ने चेन पुलिंग कर दी। इंजन का प्रेशर डाउन होने के कारण ट्रेन आउटर पर ही खड़ी रही। बाद में पिपराइच स्टेशन पर भी इसे रोक दिया गया। करीब दस मिनट बाद बांद्रा से मुजफ्फरपुर अवध एक्सप्रेस भी पहुंच गई। इसे भी करीब 45 मिनट तक रोकना पड़ा। ट्रेनों के खड़े रहने से जहां यात्री परेशान रहे, वहीं क्रॉसिंग बंद होने से जाम में फंसे लोगों को भी काफी मुश्किलें झेलनी पड़ीं।