राजघाट के पुराने पुल पर ट्रक पलट जाने से सोमवार की सुबह साढ़े पांच घंटे तक लगे जाम में फंसने से जहर खाने वाले युवक की मौत हो गई। खजनी में पिता से विवाद के बाद जहर खाने वाले युवक को परिवार के लोग अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन वे दो घंटे तक जाम में ही फंसे रह गए। इसके चलते युवक का समय से इलाज न हो पाया। इसके बाद पुलिस को सूचना दिए बिना ही घर वालों ने युवक का दाह संस्कार कर दिया।
सोनभद्र से गिट्टी लेकर आ रहा ट्रक रविवार की रात में दो बजे नौसढ़ पहुंचा। शहर में आते समय राजघाट में राप्ती नदी के पुराने पुल से करीब 50 मीटर पहले ट्रक का अगला पहिया ब्रस्ट हो गया जिससे वह बीच सड़क पर पलट गया। ट्रक की गिट्टी फैलने से शहर में आने वाली एक लेन पूरी तरह बंद हो गई। वाराणसी, लखनऊ की तरफ से आने वाले वाहनों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तो की गई, लेकिन इसके चलते सुबह साढ़े नौ बजे के करीब राजघाट पुल पर भीषण जाम लग गया। आधे घंटे बाद दूसरी लेन पर भी गाड़ियों की रफ्तार थम गई।
जाम में राहगीरों के अलावा कई एंबुलेंस भी फंस गई। इन्हीं में पिता से विवाद के बाद जहर खाने वाला खजनी खुटभार का संजय (18) भी सवार था जो जाम में दो घंटे तक फंसा रहा। इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गई। बाद में पुलिस ने कड़ी मशक्कत से क्रेन की मदद से ट्रक को हटाकर साढ़े पांच घंटे बाद आवागमन सुचारु कराया।
स्थिति बिगड़ने के बाद चेते अधिकारी
ट्रांसपोर्टरनगर से नौसढ़ तक सोमवार की सुबह ऐसा जाम लगा कि तीन घंटे तक बाइक और साइकिल भी नहीं निकल पाई। जाम किस कदर लगा था इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जो गाड़ियां फंसी थीं, वो आगे-पीछे भी नहीं हो पा रही थीं। कई यात्री गाड़ियों से उतर कर पैदल ही बढ़ने को विवश हो गए। इसके बाद पुलिस की नींद टूटी। दिन के 11 बजे पुलिस ने ट्रक और गिट्टी हटाने की कोशिश शुरू की तब कहीं जाकर दो बजे तक सड़क साफ की जा सकी। इसके बाद पुराने पुल से गाड़ियों का आवागमन शुरू हो सका।
जाम से ट्रांसपोर्टरनगर से नौसढ़ तक करीब तीन किलोमीटर लंबी गाड़ियों की कतार लग गई। ऐसे में लखनऊ की ओर से आने वाली गाड़ियों को कालेसर से और वाराणसी की ओर से आने वाली गाड़ियों को बाघागाड़ा के रास्ते फोरलेन पर डायवर्ट किया गया। उन्हें करीब 40 किलोमीटर की ज्यादा दूरी तय करने के बाद रामनगर कड़जहां, इंजीनियरिंग कॉलेज, कूड़ाघाट के रास्ते शहर में एंट्री मिली।
जाम के चलते कई लोग लौट गए
जाम में फंसे अधिकांश लोग परेशान होकर लौट गए। जिन लोगों को कचहरी, बैंक आना था, वे पैदल पुल पार करके ट्रांसपोर्टनगर और आजाद चौक पहुंचे। वहां से वे टेंपो पकड़कर कचहरी, रेलवे स्टेशन पहुंचे। दोपहर तीन बजे के बाद स्थिति ठीक होने पर लोगों ने राहत की सांस ली।