फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र पर्यावरण के लिए हानिकारक नहीं’

Tue, 16 Sep 2014 05:30 AM IST
Gorakhpur
विज्ञापन
विज्ञापन
गोरखपुर। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र ‘बार्क’ की ओर से मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सोमवार को राष्ट्र के समावेशी विकास हेतु परमाणु ऊर्जा विषय पर एक सेमीनार का आयोजन किया गया। जिसमेें ‘बार्क’ से आए वैज्ञानिकों ने विकास में परमाणु ऊर्जा की भूमिका पर मंथन किया।
विज्ञापन

भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग की हीरक जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड, कलपक्कम के चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार और विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ओंकार सिंह के हाथों हुआ। बतौर मुख्य अतिथि डॉ. प्रभात ने कहा कि स्थायी विकास जरूरी है, इसके लिए हमें संयमित आशावादी रहना चाहिए। परमाणु ऊर्जा विभाग इसी स्थायी विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों के मन से इस विचार को हटाने की सख्त जरूरत है कि नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र हमारे पर्यावरण के लिए हानिकारक है। अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति डॉ. ओंकार सिंह ने आने वाली पीढ़ी को भाभा अनुसंधान केंद्र में कैरियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। ‘बार्क’ के जन जागरूकता विभाग के अध्यक्ष आरके सिंह ने कहा कि नाभिकीय ऊर्ज न केवल विद्युत उत्पादन के लिए बल्कि संपूर्ण मानव जीवन के लिए उपयोगी है। ‘बार्क’ से आए वैज्ञानिक केके राय, गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. राधेमोहन मिश्र ने भी विचार रखे। आभार ज्ञापन आयोजन के समन्वयक डॉ. एससी जायसवाल ने किया।

00
प्रदर्शनी में दिखी पपरमाणु अध्ययन के क्षेत्र में विकास की कहानी
गोरखपुर। ‘बार्क’ की टीम की ओर से संगोष्ठी के दौरान लगाई गई प्रदर्शनी परमाणु अध्ययन के क्षेत्र में विकास की कहानी कह रही थी। प्रदर्शनी में दर्शाए गए कलपक्कम के रिएक्टर के मॉडल, अल्ट्रा फिल्टरेशन झिल्ली, ड्रिप एंड ड्रिंक सिस्टम आदि , उन्नत बीज, कैंसर मरीजों के इलाज के लिए तैयार भाभाट्रॉन की जानकारी के प्रति विद्यार्थी बेहद उत्सुक दिखे।
विज्ञापन

00
2050 तक 25 प्रतिशत होगी नाभिकीय बिजली की भागीदारी
गोरखपुर। भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम, कलपक्कम के प्रबंध निदेशक डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि हर संभव कोशिश है कि देश के कुल विद्युत उत्पादन प्रतिशत में नाभिकीय ऊर्जा की भागीदारी 2.5 से बढ़ाकर 25 फीसदी पहुंचा दें। इसके लिए सन् 2050 तक दो लाख पचास हजार मेगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। डॉ. प्रभात मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सेमीनार के बाद संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि फिलहाल न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन की ओर से 21 रिएक्टर चलाए जा रहे हैं, जबकि हरियाणा के गोरखपुर, गुजरात के काकरापार, तमिलनाडु के उडनकुलम और राजस्थान के कोटा में रिएक्टर शुरू करने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। वहीं भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम की ओर से कलपक्कम में इस वित्तीय वर्ष के अंत तक फास्ट रिएक्टर से 500 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा और उसके बाद इतनी ही क्षमता का एक और फास्ट रिएक्टर का निर्माण शीघ्र शुरू किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें