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मनरेगा की सीबीआई जांच शुरू होने से खलबली

Fri, 29 Aug 2014 05:30 AM IST
Gorakhpur
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गोरखपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत जिले में हुए कार्यों की सीबीआई जांच से जिले में हड़कंप मचा हुआ है। दस्तावेजों को दुरुस्त करने के अलावा मौके पर हुए कार्यों में गड़बड़ी को छिपाने का प्रयास जोरो पर है। जांच चूंकि सीबीआई के हाथ में है, इसलिए सभी के होश उड़े हैं।
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सीबीआई ने तीन साल 2007 से 2010 तक के मनरेगा कार्यों के दस्तावेज तलब किए हैं। हालांकि इस बीच तमाम अफसर बदल गए लेकिन जांच प्रदेश के सभी 75 जिलों में हो रही है, इसलिए सभी की धड़कन बढ़ी हुई है। जो आज यहां तैनात हैं, उन्हें अपने पुराने तैनाती स्थल पर हो रही जांच की चिंता सता रही है। अफसरों का कहना है कि इतनी बड़ी योजना में कोई न कोई गड़बड़ी होना सामान्य है। यही नहीं तमाम दस्तावेजों के नहीं मिलने की वजह से भी जिम्मेदाराें की सांसें टंगी हैं। इनमें कई दस्तावेज कार्यों के भुगतान
के है।
सीबीआई ने शासन के मार्फत जिले में इन तीन वर्षों के बीच आवंटित और स्वीकृत बजट, कार्य और खर्च का पूरा ब्योरा तलब किया है। जांच चूंकि सीबीआई कर रही है लिहाजा शासन भी इस मामले को लेकर गंभीर है। जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि सभी दस्तावेज जल्द से जल्द मुहैया कराए जाएं ताकि जांच
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के लिए उन्हें सीबीआई को सौंपा जा सके। प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक जिले के 19 में से 16 ब्लॉकों में हुए कार्यों के दस्तावेजों की सीडी, शासन को भेज दी गई है। तीन ब्लॉकों कौड़ीराम, बांसगांव और गगहा ब्लॉक के दस्तावेज अभी नहीं भेजे जा सके हैं। बता दें कि इन ब्लॉकों में पूर्व में हुई जांचों में तमाम गड़बड़िया भी पकड़ी जा चुकी हैं।
सीबीआई ने जिन तीन वर्षों की रिपोर्ट तलब की है, यह वह दौर था जब मनरेगा का फंड ग्राम निधि में आता था और प्रधान खुद मजदूरी की रकम निकालकर संबंधित जॉब कार्ड धारकों को देते थे। बाद में जॉब कार्ड धारकों के खातों में सीधे मजदूरी की रकम आने लगी लेकिन बिना ग्राम प्रधान की मेहरबानी के वे बैंकों से इसे सीधे नही निकाल पाते थे। तब न तो कम्प्यूटर में एमआईएस फीडिंग होती थी और न ही निगरानी के लिए ग्राम रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक, एपीओ आदि जैसे पदों का सृजन हुआ था। मनरेगा की रकम पर निगरानी की ये सारी सख्ती 2010 के बाद ही शुरू हुई है। यही वजह है कि इन्हीं तीन सालों में मनरेगा में वित्तीय अनियमितता और घोटाले की आशंका जताई जा रही है।
शुरुआती जांच में गड़बड़ी मिली
तो विस्तार से जांच होगी
गोरखपुर। जनहित याचिका क ी सुनवाई में सात जनवरी 2014 को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पहले सात जिलों बलरामपुर, गोंडा, महोबा, सोनभद्र, संतकबीरनगर, मिर्जापुर व कुशीनगर में ही मनरेगा कार्यों की जांच के निर्देश दिए थे। जांच में गड़बड़ी मिलने पर सीबीआई ने सात पर केस भी दर्ज किया। सीबीआई ने जब इन सातों जिलों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सील कवर में अदालत में पेश की तो इस पर कोर्ट ने सीबीआई को प्रदेश के सभी जिलों में मनरेगा की प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दे दिया। कोर्ट ने कहा है कि प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी मिले तो सीबीआई संबंधित जिलों में मुख्य जांच करे।
सीबीआई ने शासन के माध्यम से जिले में वर्ष 2007 से 2010 के बीच हुए मनरेगा कार्यों और खर्च की पूरी रिपोर्ट मांगी है। 16 ब्लॉकों की रिपोर्ट भेज दी गई है। जल्द ही बाकी के तीन ब्लॉक ों की रिपोर्ट भी भेज दी जाएगी। रिपोर्ट देखने के बाद जरूरत पड़ने पर सीबीआई जिले में आकर भी जांच कर सकती है।
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-कुमार प्रशांत, सीडीओ
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