गोरखपुर। केंद्रीय कर्मचारियों की तरह भत्ता और पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली समेत 15 लंबित मांगों के विरोध में मंगलवार को राज्य कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी। पहले दिन का विरोध पूरी तरह सफल रहा। कलेक्ट्रेट समेत इक्का-दुक्का विभागों को छोड़कर हड़ताल में सभी विभागों के कर्मचारी शामिल हुए। बिना किसी दबाव के कर्मचारियों ने सुबह 11 बजे कामकाज बंद कर दिया और दफ्तरों से बाहर चले आए। दफ्तरों का हाल यह था कि अफसर केबिन में मौजूद रहे लेकिन कर्मचारियों की कुर्सियां पूरे दिन खाली रही। सभी कर्मचारी सिंचाई विभाग के कार्यालय पर जुटे जहां एक सभा हुई। इस दौरान कर्मचारी नेताओं ने मांगें नहीं माने जाने तक हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दी।
कर्मचारी संगठनों के वादे के अनुसार आकस्मिक सेवाएं सुचारु ढंग से चलती रहीं। जिला अस्पताल के कर्मचारी दोपहर एक बजे तक काम करते रहे और ओपीडी बंद होने के बाद हड़ताल में शामिल हो गए। कर्मचारियों के नहीं मिलने की वजह से विकास भवन पर आए कु छ फरियादियों को मायूस लौटना पड़ा। कलेक्ट्रेट के कर्मचारी इस हड़ताल से बाहर रहे और वहां कामकाज चलता रहा। रजिस्ट्री दफ्तर में रोजाना की तरह भीड़ रही। जीडीए के कर्मचारी नेताओं ने समर्थन दिया लेकिन ज्यादातर कर्मचारी काम करते रहे। गीडा कर्मचारी संघ ने भी हड़ताल का समर्थन किया। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष रूपेश श्रीवास्तव ने कहा कि कलेक्ट्रेट के कर्मचारी अगर इस लड़ाई में शामिल नहीं होंगे तो कर्मचारी समाज उनका बहिष्कार करेगा। हड़ताल खत्म करने या इसमें शामिल कर्मचारियों पर शासन-प्रशासन ने दबाव बनाने की कोशिश की तो आकस्मिक सेवाएं भी ठप करा दी जाएंगी।
कार्रवाई हुई तो जेल भरेंगे: रूपेश
राजाज्ञा जारी नहीं हुआ तो अनिश्चित कालीन होगी हड़ताल
गोरखपुर। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार के आश्वासन के घुट्टी पिलाकर सुलाने के कारण कर्मचारियों को इस हड़ताल करने का निर्णय लेना पड़ा। राजाज्ञा जारी होने तक हड़ताल जारी रहेगी। यदि दमन की कार्रवाई हुई तो कर्मचारी जेल भरने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
राज्य कर्मचारी अधिकार मंच के आह्वान पर आयोजित हड़ताल में शामिल कर्मचारियों की सिंचाई विभाग के कार्यालय पर आयोजित सभा में उन्होंने कहा कि सरकार की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में है। जब प्रमुख सचिव और मुख्य सचिव से वार्ता के बाद बहुत सी मांगों पर सहमति बनी तो राजाज्ञा क्यों नहीं निर्गत किया गया। महासंघ के अध्यक्ष नंदलाल ने कहा कि कर्मचारी हड़ताल नहीं करना चाह रहे थे इसे सरकार करा रही है। सरकार अपना अड़ियल रवैया समाप्त कर सहमति मांगों पर राजाज्ञा जारी करे। नरसिंह प्रसाद, शरदचंद श्रीवास्तव और दीनानाथ तिवारी आदि ने कहा कि प्रशासनिक अमला उत्पीड़न की धमकी देना बंद करे। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के अनिल किशोर पाण्डेय, रामकिशुन, बृजेश द्विवेदी, परवेज आलम सिद्दीकी ने कहा कि डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ पूरी तरह से कर्मचारी अधिकार मंच के साथ है। सभा के दौरान सुमन श्रीवास्तव, निशा बाला, बिंदू यादव, श्यामबहादुर, अनिल , कृष्णमोहन गुप्ता, मुंशरिफ, शैलेंद्र, लालमन मौर्य, नौमीलाल, जमुना यादव आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
शिक्षा विभाग में हड़ताल से हुई दिक्कत
हड़ताल के चलते शिक्षा विभाग के कार्यालयों में लोगों को काफी दिक्कत हुई। शिक्षकों और फरियादियों को कार्यालय में ताला लगे होने के कारण वापस लौटना पड़ा। मंगलवार को डीआईओएस कार्यालय में सन्नाटा रहा। संयुक्त शिक्षा निदेशक और डीआईओएस कक्ष में ताला लटका रहा। अधिकांश लिपिक भी सुबह कुछ देर बाद ऑफिस में ताला लगाकर चले गए। वेतन, पदोन्नति, पेंशन, जीपीएफ आदि के लटके मामलों की पैरवी करने आए शिक्षकों को निराश लौटना पड़ा। वहीं बीएसए कार्यालय में तालाबंदी नहंी की गई लेकिन कामकाज बंद रहा। बुधवार से शिक्षकों के समायोजन की काउंसिलिंग शुरू होने के कारण बहुत सारे शिक्षक कार्यालय आए हुए थे लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं मिल पाई।
कोषागार कर्मचारियों ने किया समर्थन
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के आह्वान पर कोषागार कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जगदीश राव की अध्यक्षता में कर्मचारियों ने बैठक की। जिसमें हड़ताल का समर्थन किया गया। सभी कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार किया।