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कमिश्नर के मोबाइल नंबर से ठगी की कोशिश

Fri, 11 Oct 2013 05:38 AM IST
Gorakhpur
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गोरखपुर। क्वीज जीत जाने और लकी ड्रॉ में मोबाइल नंबर के सलेक्शन का हवाला देकर ठगी करने के मामले अब नए नहीं रहे। ठगी केे इस अंदाज के लिए की अपनाई जा रही नई पैंतरेबाजी चौंकाने वाली है। ताजा मामला सामने आया है कमिश्नर जेपी गुप्ता के मोबाइल नंबर से अधीनस्थ अफसरों को ठगने की कोशिश का। यह जानने के बाद से पुलिस और प्रशासन के अफसर हक्के बक्के हैं। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो कमिश्नर के मोबाइल फोन नंबर की घंटी मंडल के कुछ एसडीएम और बीडीओ के फोन पर बजी थी। इस दौरान सौदेबाजी जैसी बातचीत ने संदेह पैदा किया तो साफ हुआ कि कमिश्नर के फोन नंबर का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे पूर्व भी वीआईपी नंबरों से सरकारी महकमों के अफसरों को फोन कर उने रुपये ऐंठने की कोशिशें हुई हैं। कमिश्नर का कहना है कि उन्हें इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है लेकिन हैकिंग जैसे अंदाज में फोन नंबर के दुरुपयोग के मामले पहले भी सामने आए हैं। बकौल कमिश्नर, उन्हें खुद मुख्यमंत्री के नाम से फोन पर ठगने का प्रयास किया जा चुका है। उन्होंने इसकी शिकायत शासन से की और इस मामले में लखनऊ का एक व्यक्ति गिरफ्तार किया गया था। चर्चा है कि आजकल पूरे प्रदेश में यह रैकेट सक्रिय है। सूत्रों के मुताबिक मेरठ और सहारनपुर में पुलिस महकमे के कुछ बड़े अफसराें के मोबाइल नंबर से भी उनके मातहतों से ठगी का प्रयास किया जा चुका है। यहां भी पुलिस महकमे के कुछ लोगों के पास इस तरह की कॉल आने की बात कही जा रही है। तकनीकी जानकार बताते हैं कि ठगी की ऐसी कोशिशों में खास तरह के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है। सीयूजी नेटवर्किंग के बाद से अफसरों या अन्य वीआईपी के फोन नंबर आसानी से जाने जा सकते हैं। सॉफ्टवेयर की मदद से कॉल रिसीव करने वाले की स्क्रीन पर मनचाहा नंबर डिसप्ले करा दिया जाता है। झांसे में घिरने वाले फोन पर कही जा रही बात को असल कॉल का मजमून मानकर ठगी का शिकार बन बैठते हैं।
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सतर्क रहें अफसर, सूचना को जांचें: कमिश्नर
कमिश्नर जेपी गुप्ता ने अफसरों व जनता से अपील की है कि अगर किसी के पास भी किसी अधिकारी या वीआईपी के मोबाइल फोन नंबर से फोन आए और इस तरह की कॉल में पैसे के लेनदेन, खास एकाउंट में धनराशि जमा कराने या अन्य कोई असाधारण बात कही जाए तो वे सतर्क हो जाएं। संबंधित अफसर या वीआईपी के बेसिक फोन पर रिंगबैक करके बातचीत की पुष्टि करें और संबंधित को उनके फोन नंबर के दुरुपयोग के प्रति आगाह करें। कमिश्नर ने माना कि इस तरह की ठगी के प्रयास की शिकायतें प्रदेश के कई स्थानों से हैं। इसमें सक्रिय लोगों का पता लगाया जा रहा है लेकिन सभी को सतर्क रहने की जरूरत है।
इंटरनेट पर इस तरह के कई सॉफ्टवेयर हैं जिनसे अपनी पहचान छुपाकर दूसरों को कॉल की जा सकती है। इसी तरह के एक सॉफ्टवेयर वोइट से दूसरों के मोबाइल नंबरों का प्रयोग कर किसी को भी फोन किया जा सकता है। कुछ अन्य सॉफ्टवेयर भी इस तरह के खेल में मददगार साबित होते हैं। थोड़ा समय लगता है लेकिन ऐसे मामलों को पकड़ा जा सकता है। अभी स्थानीय स्तर पर इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है लेकिन ऐसा मामला सामने आया तो हम उसकी जड़ तक पहुंचने में तकनीकी रूप से सक्षम हैं।
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- एसएन सिंह, प्रभारी साइबर क्राइम सेल
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