गोरखपुर। ब्रह्मलीन दिग्विजयनाथ युग पुरुष थे। वह हिंदुत्व के ध्वजवाहक थे। उनकी देश और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में प्रभावी भूमिका थी। वह भारतीय राजनीति के मार्गद्रष्टा थे। पूर्वी उत्तर प्रदेश में आध्यात्मिक, सामाजिक और शैक्षणिक पुनर्जागरण के अग्रदूत थे। यह विचार गोरखनाथ मंदिर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के सभी शिक्षण संस्थाओं से आए शिक्षकों, प्राचार्यों, संतों ने श्रद्धांजलि समारोह के समापन अवसर पर व्यक्त किए। इस मौके पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की सभी शिक्षण संस्थाएं ऐसी पीढ़ी तैयार करें जो महंत दिग्विजयनाथ के सपनों को साकार कर सके। योगी ने कहा कि दिग्विजयनाथ ने एक ऐसे भारत का सपना देखा है जो शिक्षित, प्रभुता संपन्न, स्वाभिमानी, अजेय, और आध्यात्मिक हो। इस नाते उन्होंने अपने प्रेरणा पुरुष के रूप में महाराणा प्रताप को चुना। उनका यह संदेश था कि जब तक भारत अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं कर ले तब तक देश की युवा पीढ़ी को यदि घास की रोटी खाना पड़े तो अपने इस लक्ष्य से न डिगे। इसलिए उन्होंने विवेकानंद और शंकराचार्य पैदा करने वाली शिक्षा व्यवस्था की नींव रखी। वह चाहते है कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से निकले लोग अखंड भारत का संकल्प लें। कार्यक्रम में कौशल किशोर दास, धर्मेन्द्र नाथ वर्मा, यूपी सिंह, स्वामी चिन्मयानंद, रामविलास वेदांती, शिवनाथ जी, महंत प्रेमदास, महंत शक्तिनाथ आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।