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जिला अस्पतालों के इलाज पर विश्वास ही नहीं

Mon, 22 Jul 2013 05:32 AM IST
Gorakhpur
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गोरखपुर। इंसेफेलाइटिस का इलाज कराने के लिए जिला अस्पतालों पर लोगों विश्वास नहीं बन पा रहा है। गोरखपुर समेत दूसरे जिले के लोग भी इंसेफेलाइटिस के मरीजों को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। यदि कोई मरीज जिला अस्पताल ले जाया जाता भी है तो उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जा रहा है।
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इंसेफेलाइटिस के मरीजों के इलाज के लिए जिला अस्पताल ही नहीं सीएचसी और पीएचसी तक में समुचित व्यवस्था करने का शासन का निर्देश है। गोरखपुर जिला अस्पताल में इंसेफेलाइटिस के मरीजों के लिए इलाज के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस इंसेफेलाइटिस वार्ड बनाया गया है। इसके लिए डॉक्टरों की एक टीम भी बनाई गई है, वेंटिलेटर को छोड़ कर अन्य सभी जरूरी सुविधाएं यहां उपलब्ध हैं लेकिन जिले के लोग इंसेफेलाइटिस के मरीजों को लेकर मेडिकल कालेज ही पहुंच रहे हैं। हालत यह है कि बस्ती, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज आदि क्षेत्रों के अलावा बिहार और नेपाल के मरीज भी इलाज कराने के लिए नजदीकी जिला अस्पताल की बजाय मेडिकल कॉलेज ही पहुंच रहे हैं। मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पताल में जाने पर रेफर किए जाने के कारण वह सीधे मेडिकल कॉलेज जाना मुनासिब समझ रहे हैं।
बस्ती के राजेश ने बताया कि उनके रिश्तेदार रोहित (6) को तेज बुखार और सांस फूलने की समस्या होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहां से थोड़ी देर बाद ही मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। इसी तरह गगहा कौरी के राम ने बताया कि साढ़े चार वर्षीय ईशू को पहले पीएचसी में भर्ती कराया। वहां से रेफर किए जाने के बाद मेडिकल कॉलेज में इलाज करा रहे है।
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सीएमओ डॉ. एमपी सिंह ने कहा कि जिला अस्पताल में इंसेफेलाइटिस के मरीजों के इलाज की सुविधा उपलब्ध है। लोग अपनी सुविधानुसार इलाज करा रहे हैं। सीएचसी और पीएचसी में भी इंसेफेलाइटिस के मरीजों के लिए बालरोग विशेषज्ञ तैनात हैं। जिन स्वास्थ्य केन्द्रों पर बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं वहां शीघ्र तैनाती की जाएगी।
मेडिकल कॉलेज में दवाओं की किल्लत
गोरखपुर। मेडिकल कालेज में इंसेफेलाइटिस के मरीजों को दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। इंसेफेलाइटिस के मरीजों के निशुल्क इलाज की सरकार की योजना जमीनी स्तर पर फेल होती दिख रही है।
सिद्धार्थनगर के बाल गोविंद ने बताया कि वे अपनी बच्ची का मेडिकल कॉलेज में इलाज करा रहे हैं। अस्पताल से कुछ दवाइयां ही मिल पा रही हैं। ज्यादातर दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही है। मोतीराम अड्डा के कामाख्या तिवारी ने मेडिकल कॉलेज से दवाएं नहीं मिलने के कारण इंसेफेलाइटिस से पीड़ित बच्ची सोनी (14) के लिए बाहर से दवाएं खरीद रहे हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य योगेश दुबे ने भी इंसेफेलाइटिस से पीड़ित मरीजों के इलाज की व्यवस्था भी नाराजगी जताई है कहा कि इस मुद्दे को लेकर अगस्त माह में वे जन आदलत लगाने जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. केपी कुशवाहा ने बताया कि कुछ दवाओं की कमी है। दवा खरीद का टेंडर होने के बाद आपूर्ति शुरू हो गई है। जल्द ही यह समस्या दूर कर ली जाएगी।
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