गोरखपुर। नाभिकीय ऊर्जा को लेकर समाज में ढेर सारी भ्रांतियां हैं। भ्रांतियों के कारण ही लोग नाभिकीय ऊर्जा के उपयोग से घबराते हैं। इसको दूर करने के लिए इसकी जरूरतों को समझना होगा।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी एवं भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र अधिकारी संगठन मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में चल रही राष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतिम दिन स्वजेश कुमार मल्होत्रा ने ये बातें कहीं। नाभिकीय ऊर्जा-आवश्यकता, जनभ्रांतियां एवं वास्तविकताएं विषय पर कहा कि भारत 2030 तक अपनी जरूरतों को परमाणु ऊर्जा के द्वारा आत्मनिर्भर होने की संकल्पना रखता है। सभी भ्रांतियों को दरकिनार करते हुए वास्तविकता पर जोर देकर नाभिकीय ऊर्जा का प्रयोग कर देश को विश्व के मानचित्र में अग्रणी स्थान पर स्थापित करना होगा।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी रक्षा अध्ययन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने आपदा प्रबंधन, विकास और पर्यावरणीय असुरक्षा पर विस्तृत चर्चा की। कहा कि भारत प्राकृतिक एवं मानव निर्मित दोनों प्रकार के जोखिम के लिए संवेदनशील है। इन आपदाओं से अपार जन-धन की क्षति होती है। ऐसी प्रौद्योगिकी का विकास होना चाहिए जो विकास के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगी हो। देव प्रकाश ने भारतीय नाभिकीय संयंत्रों में एवं उसके चारो तरफ पर्यावरण संरक्षण विषय पर प्रकाश डाला। कहा कि नाभिकीय ऊर्जा केंद्र एवं पर्यावरण के विकास को पारिस्थितिकी प्रिय बनना चाहिए।
कृषि एवं भोजन विषय पर आधारित व्याख्यान में डॉ. एसएसडी सूजा ने कहा कि देश के सामने पैदावार बढ़ाने, पैदावार के नुकसान में रोक, खाद्य परिरक्षणकी गंभीर चुनौतियां हैं। भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर(बार्क) से डॉ. स्मृता मूले ने आकृति परियोजना के बारे में बताया कि बार्क की तकनीकियों को लागू कर ग्रामीण परिवेश को सुदृढ़ बना सकते हैं। समापन समारोह का संचालन संगठन के अध्यक्ष आरके मिश्र ने किया।