गोरखपुर। अपर मुख्य अधिकारी (एएमए) और कैंट इंसपेक्टर के विरुद्ध न्यायालय के आदेश पर बलवा, मारपीट, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने सहित अन्य गंभीर धाराओं में न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। यह आदेश जिला पंचायत सदस्य निर्मला पासवान के आवेदन पर हुआ है। उनका आरोप था कि अपर मुख्य अधिकारी के ललकारने पर कैंट इंसपेक्टर ने उन्हें मारापीटा। उन्हें जातिसूचक गालियां दी गईं। इस दौरान उनका कपड़ा तक फाड़ दिया गया।
बता दें कि जिला पंचायत की बैठक में जो निर्णय लिया गया था, जब कार्यवृत्ति तैयार होने लगी तो उसे बदल दिया गया। इसकी जानकारी होने पर जिला पंचायत सदस्य अध्यक्ष से बैठक बुलाने की मांग करने लगे। बैठक की तिथि 27 सितंबर निर्धारित की गई। इस बीच इस बात की जानकारी सदस्यों को हुई कि बैठक स्थगित कर दी गई। अधिकतर सदस्य यह जानने के लिए जिला पंचायत पहुंचे कि बैठक किस कारण स्थगित की गई। जैसे ही सदस्य जिला पंचायत परिसर में पहुंचे और अपर मुख्य अधिकारी आरएस यादव से बात करना चाहा दोनों पक्षों में नोकझोंक शुरू हो गई। अपर मुख्य अधिकारी के आचरण से क्षुब्ध सदस्यों ने वहीं नारेबाजी शुरू कर दी। इस बीच वहां पुलिस बुला ली गई। सदस्याें को परिसर से बाहर किया जाने लगा। जब वे हटने से मना कर दिए तो बल प्रयोग कर उन्हें बाहर किया गया।
हंगामे की जानकारी होने पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। सदस्य यह कहने लगे जिस संस्था के वे निर्वाचित सदस्य हैं उसके परिसर से उन्हें बाहर कैसे किया गया। वह लोग यहीं धरना देंगे। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद सदस्यों को जिला पंचायत में जाने दिया गया। सीडीओ की उपस्थिति में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया। पर देर रात अपर मुख्य अधिकारी ने पांच सदस्यों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करा दिया। दूसरे दिन सदस्य निर्मला पासवान ने पुलिस के वहां प्रार्थनापत्र दिया। जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो वह न्यायालय गईं। न्यायालय के आदेश के बाद शनिवार को कैंट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।
इन आरोपों में दर्ज हुआ मुकदमा
दोनो अधिकारियों पर चार से अधिक लोगों द्वारा मिलकर बवाल करने, हथियार लैस होकर मारने, पीटने, 50 से अधिक की संख्या में जुटकर लात मुक्का से चोट पहुंचाने, गाली देने, जान से मारने की धमकी देने, दस्तावेजी फ्राड करने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ है।