गोरखपुर। एटीएम चोरों को पकड़ने का जिम्मा जब एसटीएफ को मिला तो पहली पूछताछ में ही सर्विस इंजीनियर उसके टारगेट पर आ गए। पुलिस पासवर्ड जानने वाले 10 लोगों को संदिग्ध मानकर चल रही थी तो एसटीएफ के टारगेट पर कुल 13 लोग थे। इसमें आउट सोर्सिंग के जरिए एटीएम में पर्ची लगाने वाले एक दूसरी कंपनी के भी तीन कर्मचारी थे। सबसे पुराने सर्विस इंजीनियर बृजेश से पहली पूछताछ के बाद ही एसटीएफ ने उसे टारगेट पर ले लिया और बाद में वही पूरी वारदात का सूत्रधार निकला। बृजेश ने पकड़े गए विनय और अनुज को ट्रेनिंग देकर उन्हीं से एटीएम में चोरी कराई थी।
प्रशांत टावर में एसबीआई के एटीएम से 45 लाख रुपये चोरी की जांच में पुलिस के साथ साथ एसटीएफ को भी लगाया गया था। एसटीएफ ने छह बैंक कर्मचारियों, चार सर्विस इंजीनियर और एटीएम में पर्ची लगाने वाले तीन आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों को टारगेट पर लिया। पहली पूछताछ में ही सर्विस इंजीनियरों की भूमिका संदिग्ध मिल गई। एसटीएफ ने बैंक कर्मी और पर्ची लगाने वालों को किनारे कर सबसे पुराने सर्विस इंजीनियर बृजेश चौधरी से पूछताछ शुरू कर दी। पुलिस लगातार बैंक कर्मियों पर दबाव बनाए हुए थी। एसटीएफ सभी इंजीनियर पर नजर रखने के साथ साथ उनके घर-परिवार और रहन-सहन पर भी नजर रख रही थी। एसटीएफ ने बृजेश को टारगेट पर लेकर लगातार कई बार पूछताछ शुरू की तो वह अपनी ही बताई बातों में उलझने लगा। उसने ही एक ही सवाल का कई बार अलग अलग जवाब दिये, जिससे शक गहराता गया। एसटीएफ ने इसके बाद उससे कड़ाई से पूछताछ शुरू कर दी। घटना का खुलासा करने से करीब छह दिन पहले ही एसटीएफ ने बृजेश को उठा लिया तो पूछताछ में उसने सारी वारदात का खुलासा कर दिया।
बृजेश ने बताया कि वह खुद एटीएम के अंदर नहीं गया था। डायबोल्ट के पूर्व इंजीनियर और उसके दोस्त राहुल के साथ मिलकर बृजेश ने विनय और अनुज को मशीन की पूरी जानकारी दी। दोनों को बताया गया कि किस तरह से एटीएम का कैश बाक्स रीसेट कोड के जरिए खोला जा सकता है। एटीएम में चोरी करने के बाद पूरी रकम राहुल और सत्यम के पास थी। पुलिस ने सत्यम को हिरासत में लेकर रुपया बरामद कर लिया। बताया गया कि बाकी रुपये राहुल के पास है, जिसकी तलाश में दबिश चल रही है।