चिलुआताल के वेटलैंड में डाल रहे कूड़ा, एनजीटी की आपत्ति
- वेटलैंड के 500 मीटर के दायरे में नहीं डाल सकते कूड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। चिलुआताल के वेटलैंड में नगर निगम कूड़ा गिरा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने इस पर आपत्ति जताई है। मामले में नगर निगम प्रशासन के जवाब देने के बाद एनजीटी आगे की कार्रवाई करेगा। एनजीटी का कहना है कि जलस्रोतों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए उसके वेटलैंड के 500 मीटर के दायरे में कूड़ा नहीं डाला जा सकता है।
चिलुआताल के वेटलैंड में नगर निगम लंबे समय से कूड़ा गिराता आ रहा है। एनजीटी की हाई पॉवर कमेटी का कहना है अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। नगर निगम प्रशासन को दूसरे इंतजाम करने होंगे।
प्लांट नहीं बना, अब डंप कर रहे कूड़ा
गोरखपुर से रोजाना 600 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। शहर के कूड़े के निस्तारण के लिए करीब 10 साल पहले नगर निगम ने चिलुआताल से सटी भूमि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए खरीदी थी। प्लांट तो नहीं बना लेकिन भूमि को ट्रेंचिंग ग्राउंड में तब्दील कर दिया गया। अब शहर के 70 वार्डों का कूड़ा इसी भूमि पर गिराया जा रहा है। बारिश में चिलुआताल का जलस्तर बढ़ता है तो महेसरा का कूड़ा पानी में पहुंच जाता है। इससे प्रदूषण बढ़ता है। आसपास का भूगर्भ जल भी प्रदूषित हो रहा है।
कोट:::
महेसरा चिलुआताल के वेटलैंड है। इसके बावजूद कूड़ा डाला जा रहा है। कूड़ा जलाने के साक्ष्य भी मिले हैं। यह पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है। इस पर जवाब तलब किया गया है।
- राजेंद्र सिंह, सचिव, एनजीटी हाईपावर कमेटी
- कूड़ा गिराने के लिए लिए अन्य स्थान तलाशे जा रहे हैं। अब महेसरा के पास कूड़ा नहीं गिराया जा रहा है।
- डीके सिन्हा, अपर नगर आयुक्त
- कोई भी ट्रेंचिंग ग्राउंड रिहायशी इलाके से 500 मीटर दूर होना चाहिए। पेयजल के स्रोत के पास भी कूड़ा नहीं डाला जाना चाहिए। कूड़ा, कचरे में क्रोमियम, कैडमियम, मरकरी जैसे हानिकारक तत्व होते हैं। बारिश के दिनों में ये तत्व पानी के साथ भूगर्भ जल तक पहुंच कर उन्हें प्रदूषित करते हैं। महेसरा में कूड़ा गिराना नुकसानदायक है।
- डॉ. गोविंद पांडेय, शिक्षक, एमएमएमयूटी