सिद्धार्थनगर। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कार्यकर्ता सम्मेलन में भाजपा सरकार पर तीखे प्रहार करते हुए कहा कि यूपीए के बाद सत्ता में आई राजग सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साढ़े चार साल के कार्यकाल में कभी भी सदन में सवालों के जवाब नहीं दिए। आजादी के बाद ऐसा करने वाले वह पहले पीएम हैं।
शनिवार को मुख्यालय स्थित जिला कारागार के सामने मैदान में आयोजित जनपदीय कार्यकर्ता सम्मेलन में गुलाम नबी आजाद ने कहा कि साढ़े चार वर्ष का कार्यकाल बीत गया पर नरेन्द्र मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने अपने मंत्रालय से जुड़े सवालों के जवाब ही नहीं दिए। भाजपा के पूर्व शासनकाल में अटल बिहारी वाजपेयी भी ऐसे नहीं थे। वह सवालों का जवाब डटकर और निर्भीकता के साथ देते थे। राफेल सौदे पर चर्चा करते हुए कहा कि यूपीए सरकार में 530 करोड़ में खरीद हुई, पर भाजपा ने इसका 1670 करोड़ रुपये पर समझौता कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है। उन्होंने केंद्र समेत विभिन्न राज्यों में भाजपा सरकारों पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप मढ़ा। नोटबंदी पर चर्चा करते हुए कहा कि इसका फायदा सिर्फ बीजेपी को हुआ। काला धन सफेद करने में सफल रहे, जबकि कारखाने बंद हो गए। करोड़ों की संख्या में रोजगार पाए युवक बेरोजगार हो गए।
उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव कांग्रेस के लिए सुनहरा अवसर है। संगठन को चुस्त बनाकर जन-जन तक पहुंचकर पार्टी की नीतियों, यूपीए सरकार की उपलब्धियों को बताते हुए कार्यकर्ताओं के सुखदुख में सक्रिय भागीदारी की अपील की। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ठाकुर प्रसाद तिवारी की अध्यक्षता व अरुण कुमार सिंह के संचालन में हुए सम्मेलन में पूर्व सांसद मुहम्मद मुकीम, जितेंद्र सिंह व विनय पांडेय, प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व विधायक ईश्वर चन्द्र शुक्ला, अंबिका सिंह व अनिल सिंह, प्रोफेशनल कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष अमिता सिंह, पूर्व मंत्री डॉ. संजय सिंह, राष्ट्रीय कार्यसमिति के पूर्व सदस्य नर्वदेश्वर शुक्ला और जयंत्री प्रसाद मौर्य मौजूद थे।
कार्यकर्ताओं को ‘आक्सीजन’ दे गए आजाद
सिद्धार्थनगर। जनपदीय कार्यकर्ता सम्मेलन में आए पूर्व केंद्रीय मंत्री, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने जहां संगठन की गतिविधियों की हकीकत से रूबरू हुए, वहीं कार्यकर्ताओं की नब्ज भी टटोली। लोकसभा चुनाव में सफलता के लिए जरूरी मंत्र भी दे गए। कार्यकर्ताओं को नसीहत भी दी कि जो काम नहीं कर रहे हैं, वे राजनीति छोड़ दें। दिल्ली व लखनऊ का चक्कर लगाना बंद करें। केवल विजिटिंग कार्ड छपवाकर नेता न बने। इस नसीहत के साथ वह कार्यकर्ताओं को ऑक्सीजन भी दे गए।
जिला कारागार के सामने मैदान में अरसे बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में राज्यसभा में विपक्ष के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद जैसे कद्दावर नेता ने शिरकत की। सम्मेलन के बहाने लोकसभा चुनाव की बिसात बिछाने में भी कामयाब रहे। केंद्र सरकार की नाकामियों से ज्यादा उनका फोकस संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने के साथ ही लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों की जीत के टिप्स देना प्रमुख रहा। कड़े तेवर अपनाते हुए कहा कि लखनऊ व दिल्ली कार्यालय का चक्कर लगाने के साथ ही विजिटिंग कार्ड छपवाकर रूतबा बनाने की प्रवृत्ति छोड़नी होगी। माह में 20 दिन काम करने वाले ही पद को ग्रहण करें, अन्यथा साधारण कार्यकर्ता की तरह रहें। लोकसभा चुनाव की चर्चा करते हुए कहा कि 2019 में सफलता के लिए सिर्फ चार माह ही बचे हैं, पर मौजूदा तैयारी से विरोधियों से नहीं लड़ा जा सकता है। दिल्ली व उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के लिए भेदभाव व मनमुटाव खत्म करना होगा।
तीखे सवाल का शालीनता से जवाब
कार्यकर्ता सम्मेलन में ब्लॉक अध्यक्षों से संगठन की गतिविधियों पर जानकारी लेने के दौरान ब्लॉक अध्यक्षों ने तीखे सवाल भी किए। उनका कहना था कि मेहनत करने के बाद भी कोई तरजीह नहीं दी जाती है। बड़े नेता व पदाधिकारी किसी के सुख-दुख में शरीक नहीं होते हैं। जितेन्द्र धर दुबे, इकबाल अहमद, रामतेज शुक्ला के अलावा सेवादल के जिलाध्यक्ष राधेश्याम पांडेय जैसे पदाधिकारियों के सवालों का जवाब गुलाम नबी आजाद ने सलीके से देते हुए संगठन में सक्रिय रूप से कार्य करने की बात कही।
मौकापरस्तों को तरजीह मिलने से नुकसान
सम्मेलन में निष्ठावान कार्यकर्ताओं को वरीयता देने वालों के बजाय स्वार्थ में कांग्रेस की रजनीति करने वाले को तरजीह देने का मुद्दा छाया रहा। पूर्व विधायक व प्रदेश अध्यक्ष ईश्वर चन्द्र शुक्ला समेत कई नेताओं ने आरोप लगाया कि स्वार्थ सिद्ध करने के साथ ही मौकापरस्तों को टिकट देने से भी स्थिति खराब हुई है। ऐसे लोगों से कांग्रेस को परहेज करने की आवश्यकता है।
नहीं आए राज बब्बर, मायूस हुए कार्यकर्ता
जिला कार्यकर्ता सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष व फिल्म अभिनेता राज बब्बर को भी आना था। अंतिम समय में उनका कार्यक्रम निरस्त हो गया। जबकि पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी भी सम्मेलन में शरीक नहीं हो सके लिहाजा इन नेताओं को मंच पर न पाकर कार्यकर्ता मायूस दिखे।
गठबंधन से दूर रहने की सलाह
ब्लाक अध्यक्षों से मांगे गए सुझाव पर अधिकांश पदाधिकारियों ने चुनाव में गठबंधन न करने की सलाह भी दी। अकेले बल चुनाव लड़ने की हुंकार भरी। कहना था कि गठबंधन होने पर पिछलग्गू होकर कार्य करना पड़ता है। जिस दल का प्रत्याशी निर्वाचित हो जाता है, वह बाद में अलग हो जाता है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी अपने साथ लेकर चला जाता है।
जिस स्कूल में पढ़ रहे हो वहां का प्रिंसिपल रह चुका हूं
ब्लॉक अध्यक्ष के नामों पर उन्होंने कुछ ब्लॉक अध्यक्षों से उनके न्याय पंचायत की खोज खबर जब गुलाम नबी आजाद ने लेनी चाही, तो कुछ अध्यक्ष जवाब नहीं दे सके। इस पर एक ब्लॉक अध्यक्ष जबरन अपनी गतिविधियों को गिनाने लगा। इस पर उन्होंने कहा कि जिस स्कूल में अभी पढ़ रहे हो, मैं वहां का प्रिंसिपल रह चुका हूं।
नाराज गुलाम नबी 12 मिनट तक गाड़ी से नहीं उतरे
सिद्धार्थनगर। पूर्व केंद्रीय मंत्री व नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद कार्यकर्ता सम्मेलन का कार्यक्रम खुले मैदान में देखकर नाराज हो गए। 12.30 बजे उनका काफिला जिला जेल के सामने स्थित ग्राउंड पर पहुंचा। वहां उन्होंने उतरने से मना कर दिया। इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं के होश उड़ गए। इस बीच पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्धीकी काफी मान-मनौव्वल करते रहे, लेकिन वे गाड़ी से उतरे नहीं। उन्होंने गाड़ी से ही जिलाध्यक्ष ठाकुर प्रसाद तिवारी को बुलाने को कहा। जिलाध्यक्ष के काफी मनाने के 12 मिनट बाद वह गाड़ी से उतरे और बिना किसी औपचारिकता निभाए ही मंच पर अपनी बात कहने लगे।
नहीं कराया स्वागत, मेज पर ही रखा रह गया फूल
इस बीच नाराजगी का असर ऐसा रहा कि वह सीधे मंच पर आए और कार्यकर्ताओं ने उन्हें माला पहनाने की कोशिश की। लेकिन वह बिना स्वागत के ही मंच पर बैठक गए। इसके बाद बिना किसी औपचारिकता के सीधे माइक पर आ गए और कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए उन्हें ठीक से काम करने को कहा।
अचानक चले गए पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्धीकी
मान-मनौव्वल के बाद अचानक नसीमुद्दीन मंच सहित अन्य जगहों से लापता दिखे। इस पर कार्यकर्ताओं में काना-फूसी का दौर शुरू हो गया। कार्यकर्ताओं को बताया गया कि अचानक उनके घर में किसी की तबीयत खराब हो गई है। इसलिए वह चले गए हैं।
सम्मेलन में उत्साहित दिखे कांग्रेसी कार्यकर्ता
सिद्धार्थनगर। लंबे समय बाद हुए सम्मेलन में आए कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह देखने को मिला। एक तरफ जहां प्रदेश प्रभारी व पूर्व मुख्यमंत्री के स्वागत को लेकर आतुर थे, वहीं अपने-अपने सुझावों से संगठन को गतिशील बनाने की भी बात रखी।
जिला कारागार के सामने मैदान में शनिवार को नजरा कुछ बदला-बदला दिखाई दिया। सूबे में लगभग 30 वर्ष पूर्व सत्ता से दूर कांग्रेस के सम्मेलन में पहली बार कार्यकर्ता उत्साह से लवरेज दिखे। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद समेत अन्य प्रदेश स्तरीय नेताओं के पास पहुंचने के लिए होड़ लगाए थे, पर कड़ी सुरक्षा के साथ ही पहले से तय लोगों को मंच पर उपस्थिति की वजह से माल्यार्पण करना दूर, सेल्फी लेने का भी मौका नहीं पा सके। इस मौके पर जिलाध्यक्ष ठाकुर प्रसाद तिवारी, पूर्व सांसद मुहम्मद मुकीम, सदर क्षेत्र के पूर्व विधायक व प्रदेश उपाध्यक्ष ईश्वर चन्द्र शुुक्ला, पूर्व विधायक अनिल सिंह, वरिष्ठ नेता नर्वदेश्वर शुक्ला, महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष रंजना मिश्रा, यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सौरभ सिंह, सेवा दल के जिलाध्यक्ष राधेश्याम पांडेय, एससीएसटी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष देवेन्द्र कुुमार उर्फ गुड्डू समेत सच्चिदानंद पांडेय, कांति पांडेय, किरन शुक्ला, रमेश चौधरी, प्रदीप ठकुराई, कैलाश पंछी, काजी सुहेल, अब्दुल सलाम, धर्मराज सिंह, ललिता त्रिपाठी, देवेंद्र त्रिपाठी, मंगेश दुुबे, शाहरुख खान, अनिल सिंह उर्फ अन्नू, अब्बास अली आदि मौजूद रहे।