सिद्धार्थनगर। बुद्ध भूमि पर लहलहानेवाले वाले ‘काला नमक’ धान की खुश्बू व उसकी लंबाई पर शोधकार्य शुरू हो गया है। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रोद्यौगिकी विवि फैजाबाद सहित सोहना कृषि विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिकों ने ‘काला नमक’ पर शोधकार्य शुरू कर दिया है। महक और धान की लंबाई के साथ-साथ अधिक पैदावार कैसे हो, इस पर कृषि वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। टीम में सात सदस्य शामिल हैं जो वैरायटी डेवलप करने में जुटे हुए हैं।
एक जिला-एक उत्पाद योजना के बाद काला नमक की ब्रांडिंग का दौर जो शुरू हुआ है। उस पर कृषि वैज्ञानिकों ने काम तेज कर दिया है। टीम के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. मिथिलेश पांडेय के नेतृत्व में टीम के वैज्ञानिक डॉ. मारकंडेय सिंह, डॉ. एसएन सिंह, डॉ. पीके मिश्र, डॉ. एसके मिश्रा, डॉ. प्रदीप कुमार काला नमक की नई वैरायटी विकसित करने पर शोध कर रहे हैं। डॉ. मारकंडेय सिंह ने बताया कि सिद्धार्थनगर के वातावरण के अनुसार नई वैरायटी पर काम चल रहा है। उद्देश्य है कि पहले जैसी खुश्बू और धान की लंबाई को कम किया जाए ताकि अधिक से अधिक पैदावार हो सके। बताया कि धान की लंबाई अधिक होने से बीज गिर जाते हैं और धान की पैदावार घट जाती है। इस पर काम चल रहा है। बताया कि नई वैरायटी तैयार होने में कम से कम 11 साल का समय लगता है। उल्लेखनीय है कि 1993 से लेकर 2002 तक पंतनगर कृषि विवि में शोध हुआ था लेकिन तापमान के अनुकूल न होने के कारण वहां के वैज्ञानिकों को सफलता नहीं मिली।
काला नमक के लिए सबसे महत्वपूर्ण है तापमान
कृषि वैैज्ञानिक डॉ. मारकंडेय सिंह ने बताया कि काला नमक के लिए सबसे महत्वपूर्ण तापमान है। काला नमक के लिए जिला का तापमान अनुकूल है। औसतन 20 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान होना चाहिए। 15 नवंबर के बाद काला नमक के धान की कटाई की जाती है। उसी समय गेहूं की बुआई का समय होता है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद कर रहा ट्रॉयल
डॉ. मारकंडेय सिंह ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद सिद्धार्थनगर जिले को छोड़कर बस्ती व गोरखपुर मंडल के अन्य जिलों में काला नमक पर शोध कर रहा है। बस्ती, फैजाबाद, संतकबीरनगर, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज जिले में काला नमक पर काम चल रहा है। अगर सिद्धार्थनगर की तरह इन जिलों का तापमान अनुकूल रहता है तो वहां भी काला नमक की खुश्बू बिखरेगी।