सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करतीं छात्राएं।
- फोटो : Amar Ujala
मन में पुराने दिनों की यादें समेटे हुए पुरातन छात्राओं का काफिला सेंट जोसेफ कॉलेज फॉर वूमेन में बढ़ रहा था। जो पहले से वहां पहुंच गईं थीं, वो अपनी जिगरी सहेलियों को तलाशने में जुटी थीं। आमना-सामना हुआ तो विद्यार्थी लाइफ में एक-दूसरे को जिन नामों से पुकारते करते थे, उसे दोबारा याद किया और गले मिले। फिर हॉस्टल और विभागों की लैब देखी। दोस्तों के साथ सेल्फी ली और कॉलेज लाइफ की सुनहरी यादों को सहेज रवाना हुईं।
मौका था सेंट जोसेफ कॉलेज में आयोजित पुरातन छात्रा सम्मेलन का। इसे सफल बनाने में कॉलेज प्रबंधक की ओर से कोई कोर कसर नहीं छोड़ी गई थी। वर्ष 2005 से लेकर अब तक बीए-बीएससी की 10 बैच के पुरातन छात्राएं इसमें शामिल हुए।
मुख्य अतिथि आईएएस मिनिस्थी एस नायर ने कहा कि जिंदगी में असफलताओं से कभी घबराना नहीं चाहिए, उससे सीख लेने की जरूरत है। सकारात्मक सोच से असफलता को सफलता में बदला जा सकता है। अच्छा करने का गुण सभी के अंदर मौजूद है, इसे पहचानने की जरूरत है। अपने अंदर ज्ञान के प्रकाश को जलाएं रखें। कॉलेज के संस्थापक बिशप डॉ. डोमनिक कोक्कट ने कॉलेज की स्थापना से जुड़े प्रसंगों को साझा किया।
प्राचार्य डॉ. सिस्टर मर्लिन जार्ज ने कॉलेज की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर संरक्षक डॉ. थामस थिरुथिमट्टम, डॉ. फादर एंटोनी चिरप्पन, डॉ. फादर ऑगस्टिन, डॉ. फादर जोस मंजियिल, फादर जैमोन, प्रो. अनीता माइल्स, डॉ. तूलिका मिश्रा, निष्ठा पांडेय, डॉ. महिमा त्रिपाठी सहित कई लोग मौजूद थे।