गाेला बाजार में खरीदारी करतीं महिलाएं।
- फोटो : अंबरीश मिश्र
संतकबीरनगर। दीपावली की पूर्व संध्या पर बुधवार को नगर के लेकर गांव के बाजार गुलजार रहे। सुबह से लोग बाजारों में खरीदारी के लिए उमड़ पड़े। खरीदारी का यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा। इस अवसर दौरान पूजन सामग्री से लेकर कपड़ा, बर्तन, सौंदर्य प्रसाधन व गिफ्ट आइटम की दुकानों पर ग्राहकों की कतार लगी रही। हर शख्स दीपावली को खास बनाने में जुटा दिखा। ज्योतिपर्व के लिए श्रीगणेश और देवी लक्ष्मी की मूर्तियां बिकीं तो प्लास्टर ऑफ पेरिस और पीतल, चांदी से बनी मूर्तियों की भी मांग तेज नजर आई। दीया, बत्ती, झालर, कपड़ा, मिठाई, फूल-मालाओं की बिक्री जोरों पर रही। ग्राहकों को लुभाने के लिए दुकानदार भी हरसंभव जतन करते दिखे।बैंकों के एटीएम पर लंबी कतारें देखी गईं। खलीलाबाद की तरह ही धनघटा, हैंसर, पौली, मेंहदावल, सेमरियावां, बखिरा, बेलहर, सांथा, नंदौर आदि जगहों पर भी लोग खरीदारी करते देखे गए। वहीं जूनियर हाईस्कूल खलीलाबाद के मैदान में पटाखों की दुकानों पर बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करते दिखे। एक ओर नन्हें बच्चे पिस्तौल खरीदवाते मिले, दूसरी ओर बड़े बच्चे फुलझड़ी, अनारबम, चटाईबम, साधारण बम, राकेट आदि खरीदते मिले।
35-50 रुपये में बिका कमल का फूल
देवी महालक्ष्मी की पूजा के लिए कमल के फूल की खूब मांग रही। बाजारों में 35-50 रुपये में कमल का फूल बिक रहा है। दीपावली पर आसानी से फूल की सुलभता न होने से लोग एक दिन पहले ही फूलों की खरीदारी को आतुर रहे। इसका असर फूलों की दुकानों पर भारी भीड़ के रुप में दिखा। गेंदे से निर्मित माला 25-30 रुपये की दर से बेची गई।
ऐसे करें दीपावली पर पूजा
पंडित दयानंद शुक्ल ने बताया कि गुरुवार को दीपावाली का पर्व मनाया जाएगा। स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर सभी देवताओं की पूजा हल्दी, पान के पत्ते पर रख लक्ष्मी और गणेश का पूजन विधि विधान से करनी चाहिए। विद्यार्थियों व व्यापारियों के लिये लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 07:11 से लेकर रात को 08:16 तक। शस्त्र,अस्त्र और लक्ष्मी की पूजा जो महानिशा काल पूजा मुहूर्त: रात्रि 11:40 से लेकर रात को 12:31 बजे तक है। दीपावाली की शाम को घर में लक्ष्मी और गणेश जी की नई मूर्तियों को रखें। फिर पूजा चौकी पर स्वस्तिक बनाकर और चावल रखकर स्थापित कर विधि पूर्वक पूजन करें।