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गीडा की 16 फैक्ट्रियां पर लगा ताला

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गोरखपुर। आमी नदी को प्रदूषित करने के मामले में गीडा की 16 फैक्ट्रियों पर आखिरकार ताला लगा दिया गया। पुलिस टीम के साथ क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने इन फैक्ट्रियों को सील किया। इस कार्रवाई से गीडा के उद्यमियों में हड़कंप मचा हुआ है। यही नहीं, गोरखपुर की दो और फैक्ट्रियों को भी सील करने की कार्रवाई की गई।
उत्तर प्रदेश नियंत्रण बोर्ड के आदेश के बाद जिला प्रशासन, पुलिस और गीडा प्रशासन के अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम सोमवार को गीडा पहुंची। पहले इन फैक्ट्रियों का बिजली और पानी का कनेक्शन काटा गया। साथ ही उत्पादन एरिया की मशीनों व उपकरणों को सील कर दिया गया। कई फैक्ट्रियों मालिक गेट पर ताला लगाकर फरार हो गए, लेकिन इसके बाद भी टीम ने 16 फैक्ट्रियों में सील बंदी की कार्रवाई की। एसडीएम सहजनवां दिनेश मिश्र ने बताया कि देर शाम तक चली कार्रवाई के दौरान 16 फैक्ट्रियों को सील कर दिया गया। इस मौके पर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अलावा गीडा के प्रबंधक संजय तिवारी, सीओ चौरीचौरा प्रकाश कुमार सिंह, सहजनवां थाना प्रभारी, पीपीगंज, कैंपियरगंज, चिलुआताल और पुलिस लाइंस के पुलिस कर्मी मौजूद रहे।
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यह है मामला
मीरा शुक्ला और विश्व विजय सिंह ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में गीडा समेत गोरखपुर की विभिन्न फैक्ट्रियों द्वारा आमी नदी को प्रदूषित करने की शिकायत की गई थी। एनजीटी के आदेश के बाद भी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में गीडा के 44 उद्योगों से निकलने वाले गंदे और प्रदूषित पानी के ट्रीटमेंट के लिए कोई इंतजाम नहीं मिला। इन फैक्ट्रियों के मालिकों ने उत्तर प्रदेश नियंत्रण बोर्ड के नोटिस का भी कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद इन फैक्ट्रियों को नदियों को प्रदूषित करने वाला मानते हुए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव आशीष तिवारी ने बिजली, पानी का कनेक्शन काटने के साथ इन्हें बंद करने का आदेश दिया था।

गीडा में इन उद्योगों के खिलाफ हुई कार्रवाई
फेथफुल कामर्शियल लिमिटेड, रूंगटा इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, भारत इंडस्ट्रीज, महालक्ष्मी स्वीट्स, जीके फूड्स एंड वेबरेजेज, अभिराज फाइबर्स प्राइवेट लिमिटेड, कात्यायनी इंडस्ट्रीज, तन्मय इंटरप्राइजेज, यूनिटी प्लास्टिक, यशवीर इंडस्ट्रीज, शिवम प्लास्टिक, एवन कार्ड बोर्ड, नेशनल पेट्रोलियम एंड केमिकल, अयान प्रोडक्ट्स, इंडियन टैंकर्स, योग प्रोडक्ट्स।

गीडा से बाहर के उद्योग
लक्ष्मी बर्तन इंडस्ट्रीज (जंगल नकहा नंबर-2), राकेश गृह उद्योग (इंडस्ट्रियल एरिया, भगवानपुर मोहरीपुर)>

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई उद्योगों के लिए घातक: एसके अग्रवाल
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की यह कार्रवाई गीडा के उद्योगों के लिए घातक है। विभाग ने ऐसे उद्योगों में तालाबंदी कर दी है, जिनसे 50 लीटर भी पानी बाहर नहीं निकलता। उद्योगों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई सिर्फ गोरखपुर में की गई है। ऐसा लगता है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गलत मंशा से कार्रवाई कर रहा है। कोई भी फैक्ट्री मालिक प्रदूषण फैलाना नहीं चाहता। हम भी तो समाज का हिस्सा हैं। ऐसे में अगर थोड़ी बहुत कमी है तो उसे दूर करने का उपाय होना चाहिए न कि कार्रवाई। जीएसटी लागू हुआ तो केंद्र सरकार ने कैंप लगवाकर व्यापारियों की दिक्कतें दूर कीं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी कैंप लगाकर इस तरह की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। प्रदेश सरकार को भी समुचित हल निकालना चाहिए। जब कर्ज माफी की जा सकती है तो गीडा के उद्योगों को बचाने के लिए सीईटीपी भी लगाना चाहिए।
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- एसके अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष, चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज

बड़े उद्योगों पर मेहरबान है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिन 18 उद्योगों को बंद किया है और 28 को नोटिस भेजा है, वे सब बहुत ही छोटी इकाइयां हैं। निश्चित तौर पर प्रदूषण नियंत्रण के मानकों पर खरा नहीं उतर रही हैं, इसलिए उन्हें बंद किया गया है। इसके बावजूद आमी नदी में गीडा की फैक्ट्रियों का दूषित एवं प्रदूषित पानी जा रहा है। ऐसे में इसकी पूरी आशंका है कि गीडा की बड़ी फैक्ट्रियों का जहरीला पानी आमी नदी में जा रहा है। यह सब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की वजह से हो रहा है। प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ सही ढंग से कार्रवाई नहीं की जा रही है। 12 अक्टूबर को एनजीटी में सुनवाई के दौरान इस पक्ष को भी रखा जाएगा।
- विश्वविजय सिंह, संयोजक, आमी बचाओ मंच
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