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मानव मूल्यों की प्रतिष्ठा के खातिर हुआ राम का अवतार

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गोरखपुर। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ एवं ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की स्मृति में गोरखनाथ मंदिर में आयोजित बाल्मीकि रामायण पर आधारित श्रीराम कथा का शुभारंभ कथा व्यास जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामानंद दास ने किया। उन्होंने कथा के माध्यम से कहा कि श्रीराम भारत के पर्याय हैं। श्रीराम के बिना भारत में भारत वर्ष कहां।
कथा व्यास ने कहा कि श्रीराम का अवतार ही मानव मूल्यों के लिए हुआ था। इसलिए राम कथा मानव मूल्यों की पुनर्स्थापना करती है। कथा हमारे जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है। हमारे जीवन को दिशा देती है। समाज एवं राष्ट्र की एकता-अखंडता को मजबूत करती है। व्यास की संगीतमय कथा के साथ भक्तों के सुर एवं तालियों की संगत ने सभागार को भक्ति से सराबोर कर दिया। कथा व्यास ने भगवान श्रीराम के जीवन आदर्शों पर केंद्रित करते हुए कहा कि श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। वह करुणा निधान हैं। राम का जीवन मानव व जगत कल्याण का आधार है। उन्होंने राम के साथ रावण के राक्षसी प्रवृत्ति पर भी प्रकाश डाला। इस अवसर पर राममिलन दास, महंत शिवनाथ दास, अवधेश दास, नारायण गिरी, योगी मिथिलेशनाथ, रवींद्रदास, प्रेमदास, पंचानन गिरी, आदि कई संत मौजूद थे।
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अखंड ज्योति और शोभायात्रा निकली
कथा से पूर्व गोरखनाथ मंदिर से अखंड ज्योति एवं शोभायात्रा निकली जिसमें मुख्य यजमान ईश्वर मिश्र सिर पर रामायण रखकर कथा स्थल दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार तक गए। उनके साथ अन्य यजमान सीताराम जायसवाल, जवाहर कसौधन, अवधेश सिंह, पुष्पदंत जैन, नारायण अजीत सरिया, अशोक जालान, गंगा राय चंद्र प्रकाश अग्रवाल, उर्मिला सिंह, जितेंद्र चंद, जितेंद्र बहाुदर सिंह आदि मौजूद थे।
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