गोरखपुर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि 2018 के उपचुनाव में लखनऊ में बैठकर बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सिर्फ समर्थन किया था, इस बार तो गठबंधन है। सपा-बसपा हर सीट पर एक साथ है। प्रदेश में भाजपा को मुंह छिपाने की भी जगह नहीं मिलेगी। गठबंधन से भाजपा के नेताओं में घबराहट बढ़ती जा रही है। उनकी भाषा तक बदल गई है। उन्हें पता ही नहीं वे मंचों से क्या बोल रहे हैं।
अखिलेश, सोमवार को शहर के चंपा देवी पार्क में गोरखपुर, बांसगांव के साथ ही कुशीनगर और महराजगंज के गठबंधन प्रत्याशियों के पक्ष में सभा कर रहे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री के संविधान वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि उनका समाज तो दूध-घी बेचकर अपना गुजारा कर लेगा । बाबा अपनी फिक्र करें, उन्हें तो मंदिर में जाकर घंटा बजाना पड़ेगा। बाबा बार-बार ठोको -ठोको बालते हैं तो पुलिस भी समझ नहीं पा रही कि किसे ठोकना है। कभी शिक्षा मित्र ठोके जा रहे तो कभी निर्दोष।
अखिलेश ने कहा कि छुट्टा जानवर किसानों और आम लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। अब सांड़ों पर तो मुकदमा नहीं दर्ज कराया जा सकता मगर इसके लिए सरकार जिम्मेदार है। मुख्यमंत्री पर मुकदमा होना चाहिए। कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सपा सरकार ने 102 और 108 सेवा शुरू की थी। इसी तरह कानून व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए 100 नंबर सेवा शुरू की गई थी मगर भाजपा सरकार ने सब ध्वस्त कर दिया। आक्सीजन की कमी से बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की जान चली गई। सरकार अपनी गलती छिपाने के लिए जिसे फंसा रही थी उसका सम्मान सुप्रीम कोर्ट ने लौटाया। सभा में गोरखपुर प्रत्याशी रामभुआल निषाद, महराजगंज प्रतयाशी कुंअर अखिलेश सिंह, सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल, जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव, महानगर अध्यक्ष जियाउल इस्लाम समेत कई सपा नेता मौजूद रहे।
सिलिंडर दिया, महंगाई नहीं रोक पाए
अखिलेश ने कहा कि भाजपा ने उज्जवला योजना के तहत सिलिंडर तो दिए मगर उसके दाम बढ़ाती गई। नतीजतन गरीब, दोबारा कभी उसमें गैस नहीं भरा सके। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से लोग परेशान है। नोटबंदी और जीएसटी ने तमाम लोगों का कारोबार और व्यवसाय बंद कर दिया। उन्होंने निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद और उनके बेटे प्रवीण निषाद को घेरते हुए कहा कि बेटे का टूटा हाथ लेकर संजय मठ से ऐसा प्रसाद पाए कि अपने समाज को ही भूल गए। जिसने आरक्षण खत्म किया उन्हीं के साथ हो लिए। उन्होंने निषाद समाज को छलने का काम किया। मगर समाज के लोग समय रहते उससे सतर्क हो गए।
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