बेसिक शिक्षा विभाग ने 103 ऐसे स्कूलों को चिन्हित कर नोटिस जारी किया है। यह चेतावनी दी है कि अगर शासन की ओर दी जाने वाली पांच हजार रुपये की धनराशि लैप्स हुई तो निजी स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं शुक्रवार की शाम तक स्कूलों से बच्चों की जानकारी तलब की है।
निशुल्क बाल शिक्षा अधिकार के तहत निजी स्कूल में पढ़ने वाले गरीबों के मेधावी बच्चों की किताबों और स्कूल ड्रेस के लिए प्रदेश सरकार ने 1.7 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है। प्रति छात्र पांच हजार रुपये की धनराशि अभिभावक के खाते में भेजी जानी है। इसके लिए अभिभावकों को आवश्यक जानकारी प्रधानाचार्य के पास उपलब्ध करानी है। सात दिनों से चल रहे पंजीकरण में अब तक एक तिहाई अभिभावकों ने भी जानकारी नहीं दी है। जबकि जिले के निजी स्कूलों में 2334 गरीबों के मेधावी बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इसी वजह से 155 निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले गरीबों के बच्चों में से महज 48 स्कूलों ने अभी तक बच्चे के अभिभावक के बैंक पासबुक सरीखी अहम जानकारी देकर सत्यापन कराया है। इस वजह से सरकार की ओर से दिए जाने वाले पांच हजार रुपये की सहायता गरीबों को नहीं मिल पा रही है। निजी स्कूलों की मनमानी से तंग आकर बेसिक शिक्षा विभाग इन निजी स्कूलों को नोटिस जारी किया है।