दिव्यांग की देखभाल को सीसीएल में उम्र की बाध्यता खत्म
रेलवे ने नियम में बदलाव कर महिला कर्मचारियों को दी छूट
सेवाकाल में मिलती है 730 दिन की छुट्टी
राजन राय
गोरखपुर। दिव्यांग बच्चों की देखभाल के लिए रेलवे ने महिला रेल कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) लेने के लिए दिव्यांग बच्चे की उम्र की बाध्यता खत्म कर दी गई है। यानी जब तक दिव्यांग आश्रित है, महिला रेलकर्मी अवकाश ले सकती हैं। पहले यह अवधि 22 साल निर्धारित थी। रेलवे बोर्ड का आदेश जोनल मुख्यालयों पर आ चुका है। इसे अमल में लाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
सीसीएल मामले में महिला रेलकर्मी सेवाकाल में दो साल (730 दिन) अवकाश ले सकती हैं। सामान्य और दिव्यांग बच्चों के लिए अलग-अलग उम्र निर्धारित है। सामान्य बच्चे के जन्म से लेकर 18 साल तक देखभाल के लिए सीसीएल मिलता है, जबकि दिव्यांग के मामले में उम्र 22 साल है। दिव्यांग संतान की देखभाल के लिए महिलाओं को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। महिला संगठन और ट्रेड यूनियन लंबे समय से सीसीएल में दिव्यांग बच्चे की उम्र की बाध्यता खत्म करने की मांग कर रही थी। रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक (स्थापना) ने 17 अक्तूबर 2018 को नियम में बदलाव कर पत्र जारी कर दिया। इस नियम को 13 जून 2018 से लागू भी कर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि दिव्यांग बच्चों की उम्र की बाध्यता नहीं रहेगी। हालांकि इसके लिए महिला कर्मचारी को संतान के दिव्यांग होने का चिकित्सकीय प्रमाण पत्र देना पड़ेगा।
अब न्यूनतम पांच दिन सीसीएल मिलेगा
गोरखपुर। महिला कर्मचारी अब न्यूनतम पांच सीसीएल ले सकेंगी। अभी तक यह समय सीमा 15 दिन की थी। रेलवे ने सीसीएल की अवधि को भी घटा दिया है। पूर्व के नियम के मुताबिक महिलाएं एक साल में तीन बार सीसीएल ले सकती हैं।