कानपुर, लखनऊ के ध्यानार्थ
फोटो
‘कंजूस’ ने सिखाया और हंसाया भी
- अभिनय नाट्य कला केंद्र, कानपुर के कलाकारों ने दीक्षा भवन में दी प्रस्तुति
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर।
उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ की ओर से गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षा भवन में चार दिवसीय संभागीय नाट्य समारोह का प्रारंभ शुक्रवार को हुआ। पहले दिन अशोक श्रीवास्तव के निर्देशन में अभिनय नाट्य कला केंद्र, कानपुर के कलाकारों ने नाटक ‘कंजूस’ का मंचन किया। सवा घंटे के इस नाटक ने दर्शकों को न सिर्फ कई संदेश दिए, बल्कि खूब हंसाया भी।
कंजूस की कहानी 60 वर्षीय लालची शख्स मिर्जा की है। उसे रिश्तों से ज्यादा दौलत से प्यार है। इसीलिए मिर्जा अपनी बेटी अजरा का निकाह 50 वर्ष के असलम साहब से और बेटे फारुख का निकाह एक बेवा से कराकर खुद जवान लड़की मरियम से निकाह करना चाहता है। अजरा नासिर से मोहब्बत करती है जो उसकी खातिर फौज की नौकरी छोड़कर मिर्जा के यहां नौकर बन गया है। उधर, फारूख का भी इश्क में यही हाल है। फारूख की परेशानी तब और बढ़ जाती है जब उसे दोस्तों से पता चलता है कि मिर्जा साहब भी उसी लड़की से निकाह करना चाहते हैं जिसे वह चाहता है। इश्क, मोहब्बत, कंजूसी और मिर्जा साहब के यहां हुई चोरी के उतार-चढ़ाव से गुजरती इस कहानी ने सभी को रंगमंच का हिस्सा बना दिया। डॉ. रामशंकर, राहुल राजपूत, सपना यादव, सुबोध यादव, तारा सिंह, सर्वेश श्रीवास्तव, रंजीत, चंदन शर्मा, किरन राजभर, जागृति श्रीवास्तव, शैलेंद्र यादव व सुरेश शर्मा ने नाटक को अपने अभिनय से जीवंत कर दिया। इसके लेखक मौलियार रहे। रूपांतर हजरत आवारा ने किया। आयोजन में जिला प्रशासन के साथ ही रूपांतर नाट्य मंच के निशिकांत पांडेय, अपर्णेश मिश्रा, रवि प्रताप सिंह आदि का सहयोग रहा।
‘मेरा नाम मथुरा है’ का मंचन आज
संभागीय नाट्य समारोह के दूसरे दिन शनिवार को शाम 6 बजे विश्वविद्यालय के दीक्षा भवन में ‘मेरा नाम मथुरा है’ का मंचन मनोज मंजुल के निर्देशन में किया जाएगा।