दर्स के मौके पर सजा नार्मल स्थित हजरत मुबारक खां शहीद का दरगाह।
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नार्मल स्थित दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद पर 12 दिवसीय ‘महफिल-ए-सीरतुन्नबी’ का सिलसिला चौथे दिन शुक्रवार को भी जारी रहा। इसमें कई इस्लामिक विद्वानों ने दर्स पेश किया।
मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि अल्लाह ने बंदों की हिदायत के लिए अपने नबियों पर मुख्तलिफ किताबें और सहीफे नाजिल कीं। अल्लाह ने हजरत मूसा पर तौरेत, हजरत दाऊद पर जबूर, हजरत ईसा पर इंजील और दीगर नबियों पर दूसरी किताबें या सहीफे नाजिल फरमाईं। इन नबियों की उम्मतों ने इन किताबों को घटा या बढ़ा दिया और अल्लाह के हुक्म को बदल डाला। तब अल्लाह ने हजरत मोहम्मद पर कुरआन-ए-पाक नाजिल फरमाया। कुरआन में हर चीज का इल्म है। कुरआन तबसे आज तक वैसा ही है जैसा नाजिल हुआ था और हमेशा वैसा ही रहेगा।
दरगाह मस्जिद के इमाम मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने भी दर्स दिया। इस मौके पर अहमद फराज, दरगाह सदर इकरार अहमद, रमजान, कुतबुद्दीन, अजीम, अब्दुल अजीज, सैफ अली, मो. अजीम, कैश रजा, मो. इब्राहीम आदि मौजूद रहे।
जश्न-ए-आमदे रसूल जलसा आज
आशिकाने रसूल कमेटी की जानिब से पांडेयहाता स्थित दरोगा मस्जिद में शनिवार रात 8:30 बजे जश्न-ए-आमदे रसूल जलसे का आयोजन होगा। इसे मुफ्ती मोहम्मद अलाउद्दीन मिस्बाही खिताब करेंगे। यह जानकारी कमेटी की ओर से इंजीनियर सेराज अहमद ने दी है।