हजरत मोहम्मद की यौम-ए-पैदाइश के उपलक्ष्य में 12 दिवसीय कार्यक्रम शुरू हुआ।
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नार्मल स्थित दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद पर 12 दिवसीय ‘महफिल-ए-सीरतुन्नबी’ दर्स का आगाज मंगलवार को जोहर की नमाज के बाद हुआ।
मुफ्ती अख्तर हुसैन ने नबी-ए-पाक हजरत मुहम्मद की जिंदगी व सीरत पर रोशनी डाली। कहा कि जब-जब दुनिया में बुराइयां बढ़ती हैं तब-तब खुदा इंसानों की रहनुमाई के लिए नबी व रसूल को भेजता है। नबी-ए-पाक ने ऐसे जमाने में जन्म लिया, जब अरब के हालात बेहद खराब थे। बच्चियों को जिंदा दफन कर दिया जाता था। बेवाओं पर अत्याचार होता था। छोटी-छोटी बात पर तलवारें चल जाती थीं। इंसानियत शर्मसार हो रही थी। ऐसे समय में इंसानों की रहनुमाई के लिए इस्लामी तारीख 12 रबीउल अव्वल शरीफ को अरब के मक्का शहर में नबी-ए-पाक का जन्म हुआ। उन्होंने हमेशा यही शिक्षा दी कि हम सभी एक खुदा के बंदे हैं।
मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि उस दौर में हजरत मोहम्मद साहब का विरोध भी हुआ। उन्हें तरह-तरह की तकलीफें दी गईं, मगर उन्होंने इनका हंसकर सामना किया। इतनी परेशानियों के बाद भी उन्होंने खुदा के पैगाम को पूरी दुनिया में पहुंचाया। इस मौके पर दरगाह सदर इकरार अहमद, कारी महबूब आलम, शाह आलम, शहादत हुसैन, रमजान, कुतबुद्दीन आदि मौजूद रहे।