पूर्वांचल और नेपाल बॉर्डर के इलाकों में मौजूद दुर्लभ प्रजातियों पर अब गोरखपुर यूनिवर्सिटी के वनस्पति विभाग के शोध छात्र भी काम करेंगे। वे एनबीआरआई की मदद से नेपाल और हिमालयी वनस्पतियों से दवाएं बना सकेंगे। इसे लेकर गोरखपुर यूनिवर्सिटी और नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई) के बीच करार हुआ है। एनबीआरआई के निदेशक प्रो. एसके बारीक और गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. वीके सिंह की मौजूदगी में दोनों संस्थानों ने सोमवार को एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
कुलपति प्रो. वीके सिंह ने बताया कि यह करार गुणवत्तापूर्ण रिसर्च के लिए मील का पत्थर साबित होगा। एमओयू का प्रारूप तैयार करने वाले वनस्पति विभागाध्यक्ष प्रो. वीएन पांडेय ने बताया कि पिछले महीने कुलपति ने एनबीआरआई के निदेशक को पत्र लिखकर करार की मंशा जताई थी। एनबीआरआई निदेशक ने इसे स्वीकार करते हुए छह नवंबर को करार के लिए दिन निर्धारित किया था। तय दिन के मुताबिक दोनों संस्थान प्रमुखों ने इसे अमलीजामा पहनाया है। इस मौके पर एनबीआरआई निदेशक और कुलपति ने वनस्पति विभाग की तरफ जाने वाली सड़क के किनारे पौधरोपण किया। इस दौरान डीन प्रो. रविशंकर सिंह, प्रो. विनोद सिंह, प्रो. मालविका श्रीवास्तव, प्रो. पूजा सिंह, डॉ. अनिल द्विवेदी, रजिस्ट्रार शत्रोहन वैश्य आदि मौजूद थे।
करार से होंगे ये लाभ
- एनबीआरआई में हो रहे नए शोध की जानकारी मिलेगी।
- यूनिवर्सिटी के शोध छात्र अधिकार पत्र लेकर एनबीआरआई जाकर वहां के वैज्ञानिकों की मदद ले सकेंगे।
- एनबीआरआई की लैब अत्याधुनिक उपकरणों से लैस है, इसका भी फायदा यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों को मिलेगा।
- किसी भी टॉपिक पर दुनिया की किसी घटनाओं के बारे में जानकारी आदान-प्रदान कर सकेंगे।
- एनबीआरआई की तकनीक का भी लाभ मिलेगा। दोनों ही संस्थान अपने यहां विशेष कार्यशाला और लेक्चरर बुला सकेंगे।