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काम छोड़ लेखपालों ने धरना दिया

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सिद्धार्थनगर। वेतन-भत्ते की विसंगतियों को दूर करने सहित छह सूत्री मांगों को लेकर लेखपालों ने मंगलवार को कार्य बहिषकार कर जिले की सभी तहसीलों में धरना दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम व एसडीएम को सौंपते हुए चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वह आगे आंदोलन को उग्र रूप देने को बाध्य होंगे। हड़ताल का असर तहसील दिवस पर भी खूब दिखा।सदर तहसील परिसर में धरने में जिला उपाध्यक्ष रामकरन गुप्ता ने कहा कि जब-जब कर्मचारियों की जायज मांगों की बात आती है, तब सरकार बजट का रोना रोती है। वहीं, जब राजनेताओं के सुख-सुविधा में वृद्धि की बात होती है तो सभी नेता ध्वनिमत से पारित कर लेते हैं। तहसील अध्यक्ष कृष्ण भूषण द्विवेदी की अध्यक्षता में आयोजित धरने में जिला मंत्री रामसमूझ, कोषाध्यक्ष सुधीर श्रीवास्तव, देवानंद, महेंद्र साहनी, गिरीश चंद्र मिश्र, गणेश त्रिपाठी, अरुण श्रीवास्तव, संजय कुमार, सुरेंद्र भारती, बृजेश त्रिपाठी, अब्दुल गफ्फर, योगेंद्र वर्मा, रामनरायन चौबे आदि मौजूद रहे। संचालन तहसील मंत्री उमेश चंद्र वर्मा ने किया। डुमरियागंज प्रतिनिधि के अनुसार, तहसील परिसर में लेखपाल संघ के बैनर तले 6 सूत्री मांगों को लेकर लेखपालों ने विरोध प्रदर्शन किया व धरना दिया। इस दौरान लेखपालों पर नेताओं की अपमानजनक टिप्पणी पर अंकुश लगाने पर भी नाराजगी जताई गई। धरने में तहसील अध्यक्ष रमेशचंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि 21 सितंबर 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने संघ के सभी छह मांगों को शीघ्र पूरा करने का आश्वासन दिया था, मगर इसे आज तक पूरा नहीं किया गया।अंत में लेखपालों ने सीएम को संबोधित ज्ञापन विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह और एसडीएम राजेंद्र प्रसाद को सौंपा। इस मौके पर मुतीम अहमद, शकील हैदर, गंगोत्री प्रसाद, आरपी राहुल, मोहम्मद इस्लाम, जियालाल, देवेश, सौम्या, विपिन, प्रियंका, मधु, शैलजा, प्रभात, सतेंद्र, आनंद, राजेश प्रताप आदि मौजूद रहे।
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