गोरखपुर। गोरखपुर यूनिवर्सिटी के टॉपर फर्जीवाड़े में नया मोड़ आ गया है। जांच कमेटी की रिपोर्ट में दोषी ठहराई गईं डॉ. नीलम पांडेय ने हाईकोर्ट में यूनिवर्सिटी प्रशासन के फैसले को चुनौती दी है। कोर्ट में डॉ. नीलम ने खुद को शिवांगी पांडेय ठहराए जाने को आधारहीन बताया है। वहीं उत्तर पुस्तिका लिखने वाली परीक्षार्थी और याचिकाकर्ता की लिखावट में कोई मेल ना होने की बात कही है। इसके बाद से कोर्ट ने डॉ. नीलम के खिलाफ चल रही कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पहली नजर में याचिकाकर्ता की बातों को सही माना है और फिलहाल डॉ. नीलम के विरुद्ध यूनिवर्सिटी प्रशासन को किसी तरह की कार्रवाई न करने का आदेश देते हुए यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। बता दें कि यूनिवर्सिटी की वर्ष 2016 की बीए टॉपर शिवांगी पांडेय को लेकर विवाद हुआ था। यूनिवर्सिटी की जांच में पता चला था कि रेशमा देवी महाविद्यालय, अमवां सोहनरियां देवरिया की छात्रा शिवांगी पांडेय और कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. नीलम पांडेय एक ही शख्स हैं। जांच समिति की सिफारिशों के आधार पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने न केवल शिवांगी पांडेय के बीए तीनों वर्ष के अंक पत्र रद्द कर दिए बल्कि डॉ. नीलम पांडेय के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कराने के लिए कॉलेज को निर्देश दिया था।