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कटान से तीन टोलों का वजूद खत्म

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कुशीनगर। जिले के लिए वरदान गंडक नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए अभिशाप बनती जा रही है। नदी ने एक पखवारे में ही अहिरौलीदान गांव के दो टोलों व बिहार के एक गांव का वजूद मिटा दी है। अगस्त महीने की शुरूआत में जहां ये तीनों बस्तियां आबाद थीं, अब वहां नदी की धारा बह रही है।
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गंडक नदी के दोनों तरफ की जमीन बेहद उर्वर है। वजह यह कि पूरा इलाका नदी में आए सिल्ट से पटा है। इस जमीन में बराबर पर्याप्त नमी रहने की वजह से गन्ना, धान, गेहूं के अलावा सब्जी व तिलहन की फसल खूब उगती है। परंतु कुछ वर्षों से नदी के किनारे की खेतों व बस्तियों का कटान तेज हो गया है। जैसे - जैसे नदी कटान करती हुई आबादी की ओर बढ़ने लगी है, इस क्षेत्र में तबाही का मंजर दिखने लगा है। नदी ने इस वर्ष अहिरौलीदान में इतना कहर बरपाया कि कंचन टोला और चित्तू टोला का अस्तित्व ही समाप्त हो गया। यहां के लोग बंधों पर शरण लिए हुए हैं। सीमावर्ती बिहार का घनी आबादी वाला गांव भैंसही भी नदी की धारा में कट गया। इससे पहले नदी दुदही क्षेत्र में खुरहुरिया, रक्तहिया, कौवाखोर, बक्सर, हसुअही, महुअवा, किशुनवा, भगवानपुर आदि गांवों का अस्तित्व भी मिट चुकी है। पिपराघाट का फलटोला, एकरीटोला, गोवर्धन टोला, नान्हू टोला आदि भी गंडक की धारा में विलीन हो चुके हैं। बाढ़ प्रभावित इलाके के रहने वाले अवधेश राय, मथुरा सिंह, जेपी निषाद, शर्मा यादव का मानना है कि जब तक नदी के बांधों को सुरक्षित नहीं किया जाएगा, तब तक नदी का कहर ऐसे ही जारी रहेगा।
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