गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय में पहली बार शोध पात्रता परीक्षा (रेट) ऑनलाइन कराई जाएगी। परीक्षा में परास्नातक अंतिम वर्ष तथा परास्नातक अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा देने जा रहे विद्यार्थी भी शामिल हो सकेंगे लेकिन उनका शोध पंजीकरण परास्नातक उपाधि प्राप्त करने के बाद ही किया जाएगा। वहीं महाविद्यालयों में कार्यरत पीजी शिक्षक ही शोध करा सकेंगे। यूजी शिक्षक सह पर्यवेक्षक नामित होंगे।
शोध पात्रता परीक्षा कराने के लिए प्रशासनिक भवन में मंगलवार को कुलपति की अध्यक्षता में हुई बैठक में छह बिंदुओं पर निर्णय लिया गया। संकाय अध्यक्षों ने यूजीसी की गाइड लाइन और शासन के निर्देशों पर विचार विमर्श किया। शोध विनियम 2016 को यथावत लागू किए जाने का निर्णय किया गया। तय किया गया कि विश्वविद्यालय तथा संबंध महाविद्यालय के पूर्णकालिक एवं नियमित रूप से नियुक्त ऐसे शिक्षक ही शोध पर्यवेक्षक होंगे जो पीएचडी उपाधि धारक हों। यह अर्हता रखने वाले प्रोफेसर के न्यूनतम पांच शोध पत्र संदर्भित शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित होना जरूरी है जबकि एसोसिएट प्रोफेसर तथा असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए न्यूनतम दो शोध पत्र प्रकाशित होने आवश्यक हैं। वे महाविद्यालय ही पीएचडी पाठ्यक्रम प्रस्तुत कर सकेंगे जहां स्नातकोत्तर विभाग होंगे।
स्नातक विभाग में कार्यरत अर्हताधारी शिक्षक शोध सलाहकार परिषद के निर्णय अनुसार सह पर्यवेक्षक के रूप में नामित किए जा सकेंगे। वहीं प्रत्येक महाविद्यालय अपने यहां कार्यरत शोध पर्यवेक्षक एवं सह पर्यवेक्षक की अर्हता रखने वाले शिक्षकों की सूची तथा अपने महाविद्यालय में शोध विनियम 2016 में वर्णित आधारभूत सुविधाओं के होने संबंधित प्रमाण पत्र विश्वविद्यालय को भेजेगा जिसके आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी । बैठक में प्रति कुलपति प्रो एसके दीक्षित, प्रो सीपी श्रीवास्तव, प्रो हरिसरन, प्रो गोपीनाथ, प्रो जितेंद्र मिश्रा, प्रो रविशंकर सिंह, प्रो शोभा गौड़ एवं शोध पात्रता परीक्षा के समन्वयक प्रो हर्ष कुमार सिन्हा उपस्थित थे।
शिक्षक संघ ने किया विरोध
महाविद्यालय के संगठन गुआक्टा ने यूजी शिक्षक को पर्यवेक्षक नहीं बनाए जाने के निर्णय का विरोध किया है। अध्यक्ष एसएन शर्मा ने कहा कि पूर्वांचल विश्वविद्यालय और बरेली विश्वविद्यालय में यूजी शिक्षकों को पर्यवेक्षक बनाया गया है। संगठन का आंदोलन पूर्व की तरह चलता रहेगा।