गोरखपुर। अपोस्टोलिक कार्मल संस्था की 150वीं वर्षगांठ और कार्मल गर्ल्स इंटर कॉलेज का वार्षिकोत्सव शनिवार को धूमधाम से मनाया गया। कॉॅलेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक परिधानों में सजीं छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। उपस्थित लोग बहुत देर तक गीत-नृत्य और नाटक की दुनिया में गोते लगाते रहे।
कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य अतिथि बिशप ऑफ गोरखपुर डायसिस के थुरूतिमट्टम, विशिष्ट अतिथि पुरातन छात्रा और पद्मश्री मालिनी अवस्थी, शिवा त्रिपाठी पीसीएस (यूपी नेडा), प्रधानाचार्या सिस्टर सलीटा ने दीप जलाकर किया। उसके बाद विद्यालय के बैंड से वंदेमातरम की धुन बजाई र्गई। फिर रंगारंग कार्यक्रम इनक्रेडेबल ग्रेसिया की शुरूआत हुई। छात्राओं ने नाटक के माध्यम से अपोस्टोलिक संस्था की नींव रखने वालीं मदर वेरोनिका के जीवन दर्शन को बखूबी दिखाया।
नाटक के हर पड़ाव पर उपस्थित लोगों ने छात्राओं का तालियों से उत्साहवर्धन किया। छात्रा पल्लवी शर्मा ने कविता वाचन किया। छात्राओं ने कजरी पर मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति दी। एक के बाद एक रंगारंग कार्यक्रम ने माहौल को खुशनुमा बना दिया। चंदा-सूरज, तारे जय हैं गाते... गीत पर छात्राओं की सांस्कृतिक पेशकश ने माहौल को ऊंचाई प्रदान की। छात्राओं ने विद्यालय का स्वागत सुनाकर भी वाहवाही हासिल की। कॉलेज की प्रधानाचार्या सिस्टर सलीटा ने अतिथियों का स्वागत किया।
मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों ने छात्राओं का उत्साह बढ़ाया। साथ ही पूरे मनोयोग से आगे बढ़ने का संकल्प दिलाया। इस दौरान विद्यालय की सिस्टर मेरिसियन एसी समेत विद्यालय के सभी शिक्षक, अभिभावक मौजूद रहे।
गर्व होता है कार्मल की छात्रा रही हूं: मालिनी अवस्थी
गोरखपुर। वार्षिकोत्सव में हिस्सा लेने पहुुंची लोक गायिका और पद्मश्री मालिनी अवस्थी कार्मल की 1984 बैच की छात्रा रह चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस विद्यालय की छात्रा होने पर उन्हें गर्व की अनुभूति होती है। वर्ष 2002 में वह तत्कालीन डीएम और पति अवनीश कुमार अवस्थी के साथ विद्यालय के कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंची थीं।
अब दोबारा उन्हें पुरातन छात्रा के रूप में बुलाया गया। छात्रा के रूप में यहां आना बेहद सुखद अनुभूति है। उन्होंने कहा कि मिशनरी स्कूल में जेहन खुले हुए होते हैं। यहां के बच्चे समय-समय पर आयोजित अंग्रेजी के साथ हिंदी और संस्कृत भाषण प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। इसका पूरा श्रेय यहां के काबिल शिक्षकों के परिश्रम को जाता है।
छात्र जीवन के दिनों को याद करते हुए कहा कि विद्यालय के बाहर का चाट वाला उनके साथियों का पसंदीदा फूड कार्नर होता था, जहां वह दोस्तों के साथ चाट और गोलगप्पों का लुत्फ उठाती थी।