मंडी में टमाटर बेचते मंडी समिति के कर्मचारी।
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गोरखपुर। प्याज, टमाटर की कालाबाजारी रोकने के लिए प्रदेश सरकार की सख्ती के बाद शनिवार को मंडी में सस्ता प्याज बेचने की औपचारिकता निभाई गई। सस्ते प्याज के नाम पर व्यापारियों ने स्टॉक में पड़े खराब प्याज खपाने की कोशिश की।
सरकार की पहल पर मंडी परिषद के उप निदेशक की शुक्रवार को व्यापारियों के साथ हुई वार्ता में सस्ता प्याज और टमाटर बेचने का निर्णय लिया गया था। इसके तहत मंडी के छह थोक व्यापारियों एवं फर्म ईशा मोहम्मद एंड कंपनी, बाबू एंड कंपनी, आरिफ हुसैन एंड आसिफ हुसैन, शाह आलम एंड कंपनी, गोल्डन आलू कंपनी, त्रिलोकी नाथ एंड संस ने अपनी-अपनी दुकानों पर 32 रुपये की दर से खुदरा प्याज बेचने पर सहमति जताई थी। वहीं 35 रुपये की दर से टमाटर बेचने पर भी सहमति बनी थी। मगर शनिवार को व्यापारियों ने टमाटर बेचने के लिए अपने स्टाफ को भेजने से इंकार कर दिया। इस पर मंडी परिषद सचिव सेवाराम वर्मा ने अपने कर्मचारियों को टमाटर बेचने में लगा दिया।
मंडी निरीक्षक पवन कुमार सिंह समेत कुछ अन्य कर्मचारियों ने सुबह आठ से शाम पांच बजे तक टमाटर बेचे। पवन ने बताया कि 35 रुपये की दर से करीब सात कैरेट टमाटर बेचे गए। एक कैरेट में 27 किलोग्राम टमाटर होता है। उधर, प्याज खरीदने मंडी पहुंचे लोगों ने व्यापारियों पर खराब प्याज खपाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। मंडी सचिव ने कहा कि मंडी में अच्छी क्वालिटी का प्याज और टमाटर बेचना सुनिश्चित किया जाएगा। सोमवार को वह खुद ही इसका निरीक्षण करेंगे।
कम हुआ प्याज का थोक दाम
नए प्याज की आमद से इसकी कीमत में गिरावट होने लगी है। शनिवार को मंडी में पुराने प्याज का थोक भाव 2800 से 3400 रुपये प्रति क्विंटल रहा। वहीं नए प्याज की कीमत 2800 से 2900 रुपये प्रति क्विंटल रही। ऐसे में व्यापारियों को 32 रुपये के दर से प्याज बेचने में कोई नुकसान नहीं हुआ। हालांकि अब भी बाजार में प्याज 40 और टमाटर 60 रुपये की खुदरा दर से ही बिक रहा है।