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समाज के काम ना आने वाली शिक्षा बेकार : प्रो. दीक्षित

Sun, 05 Nov 2017 07:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी। - फोटो : Amar Ujala
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दर्शनशास्त्र विभाग और शिक्षक महासंघ की ओर से आयोजित ‘भारतीय उच्च शिक्षा : यथार्थ एवं आकांक्षाएं’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का रविवार को समापन हो गया। मुख्य अतिथि अवध यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि समाज के काम ना आने वाली शिक्षा बेकार है। वर्तमान में उच्च शिक्षा की बिगड़ती स्थिति का मूल्यांकन यदि करना है तो हमें महाविद्यालयों के स्तर से आरंभ कर विश्वविद्यालय तक जाना होगा। हमने कक्षाओं में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए छात्रों पर दबाव बनाने वाले और उन्हें मजबूर करने वाली व्यवस्थाएं तो अपना लीं लेकिन कक्षा में उठने वाली जिज्ञासाओं का सामना करने का साहस अध्यापकों में कब पैदा करेंगे, यह सोचने वाली बात है।
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विशिष्ट अतिथि चंद्रशेखर आजाद बलिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेंद्र सिंह ने कहा कि रोजगार को बढ़ावा देने के पीछे आज हमने मानवीय मूल्यों को भुला दिया है। हमें समझना होगा की विश्व की गंभीर चुनौतियों का समाधान शिक्षा में निहित है। विशिष्ट अतिथि सिद्धार्थनगर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीकांत पांडेय ने कहा कि तकनीकी शिक्षा के नाम पर हम कक्षा के मूलरूप को लगभग समाप्त कर रहे हैं। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि हमें गंभीरता से समझना होगा कि हम रोजगार पाने के लिए रोबोट बनाने के बजाय स्वाभिमानी पीढ़ी बनाने का प्रयास करें।

डॉ. आमोद राय ने संगोष्ठी की आख्या प्रस्तुत की। संचालन महासंघ के उपाध्यक्ष प्रो. रविशंकर सिंह ने किया। गोष्ठी में प्रो. आरडी राय, प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा, प्रो. केन सिंह ने भी विचार रखे। इस दौरान पूर्व कुलपति प्रो. अशोक कुमार, प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी, प्रो. गोपाल प्रसाद, प्रो. विनोद सिंह, प्रो. संदीप दीक्षित, प्रो. नंदिता सिंह आदि मौजूद थीं।
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