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लठिया सालार में दिखे हैरतअंगेज खेल, गूंजा या हुसैन

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गोरखपुर।
आठवीं मुहर्रम पर शुक्रवार को आधी रात में शहर के विभिन्न मुहल्लों से जुलूस निकले। सुन्न्नी समुदाय की ओर से लठिया सालार का जुलूस आकर्षण का केंद्र रहा तो वहीं शिया समुदाय की ओर से निकाले गए दुलदुल (दुलजना) के जुलूस में जंजीर और कमा का मातम देखते ही बना।
लठिया सलार के तहत अखाड़े नौजवानों ने लाठी फेंक प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। पूरी रात लाठियों से कमाल के करतब दिखाए गए। उनके हैरतअंगेज खेल देखकर लोगों ने दांतों तले उंगली दबा लीं। अखाड़ों को बेहतरीन खेल प्रदर्शन पर ईनाम भी दिए गए। वहीं दूसरी ओर बसंतपुर मुहल्ले से दुलदुल का जुलूस रात साढ़े 12 बजे निकला। दुलजना के जुलूस में शिया समुदाय के लोग जंजीर और कमां से मातम करते चल रहे थे। पूरे रास्ते में मातम के साथ ‘या हुसैन’ की सदाएं गूंजती रहीं। इसमें दुलजना (इमाम हुसैन के घोड़े की नकल) जुलूस की शोभा बढ़ा रही थी। जुलूस में हजरत अब्बास का अलम भी मौजूद रहा। मातम करते हुए शिया समुदाय के लोगों को जिसने देखा वह देखता ही रह गया। जुलूस कोतवाली, नखास, होता हुआ इमामबाड़ा आगा हुसैन पर समाप्त हुआ।
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आंखों में अश्क, लबों पर या हुसैन की सदा
गोरखपुर। मस्जिदों व घरों में इमाम हुसैन व उनके जांनिसारों की याद में मजलिसों का दौर जारी रहा। मस्जिदों, घरों व इमामचौकों पर फातिहा-नियाज हुई। जुमा की तकरीरों में उलेमाओं ने शोहादा-ए-कर्बला की कुर्बानियों को याद किया। गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर, गाजी मस्जिद गाजी रौजा, फिरदौस मस्जिद जमुनहिया बाग, बेलाल मस्जिद रसूलपुर, दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद नार्मल, चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर, बेलाल मस्जिद अलहदादपुर, नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर, मकबरे वाली मस्जिद बनकटी चक आदि में लोगों ने जिक्र-ए-शोहदा-ए-कर्बला सुना। इस दौरान हाफिज मोहम्मद कलाम, सैयद मुजीबुल्लाह, दबीर सिद्दीकी, शब्बीर, मुहर्रम, टुनटुन, इकरार अहमद, कुतुबुद्दीन, रमजान, कारी महबूब, शिराज, शहबाज आदि मौजूद रहे।
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