गोरखपुर।
मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के वजह से बच्चों की मौत मामले में इंसेफेलाइटिस वार्ड के नोडल अफसर रहे डॉ. कफील खान की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। नोडल अफसर के अलावा उनके वाइस प्रिंसिपल और ऑक्सीजन खरीदारी कमेटी का मेंबर होने के बाद भी समय रहते सूचना न देने का मामला उजागर होने के बाद से हड़कंप मचा है। खुद सीएम योगी आदित्यनाथ भी अपने निरीक्षण के समय डॉ. कफील को फटकार लगाई और सीधे तौर पर कहा कि ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं था तो आपने जिम्मेदारी समझते हुए सूचना क्यों नहीं दी? खबर है कि डॉक्टर की जांच शुरू हो गई है।
विवादों में घिरे डॉ. कफील के प्राइवेट प्रेक्टिस का वीडियो भी वायरल हो गया है। आजाद चौक के पास डॉक्टर का मेडिस्प्रिंग नाम से नर्सिंग होम चलता है जहां पर 24 घंटे इमरजेंसी सुविधा का दावा किया जाता है। ऐसे में सरकारी कार्य के बीच ही प्राइवेट प्रेक्टिस का समय कैसे मिल जाता है, यह एक बड़ा सवाल है। आरोप में घिरे डॉक्टर खुद की सफाई में पुराने पत्राचार का हवाला दे रहे हैं। डॉक्टर के नर्सिंग होम पर गए मरीज द्वारा वायरल किए गए वीडियो में नर्सिंग होम के डॉक्टर खुद ही डॉक्टर कफील के बैठने की न सिर्फ पुष्टि कर रहे है बल्कि उनकी काबिलियत का आधार भी इंसेफेलाइटिस वार्ड का इंचार्ज होना बता रहे हैं। खुद कार से सिलेंडर लाने और बच्चे को गोद में लेकर वायरल फोटो से हीरो बने कफील की मुश्किलें बढ़नी तय मानी जा रही है।
पुराने ट्वीट से मचा हड़कंप
डॉ. कफील के पुराने ट्वीट से भी हड़कंप मच गया है। अखिलेश यादव को किए गए ट्वीट में मोदी और अमित शाह से मुक्ति दिलाने को कहा गया है वहीं राहुल गांधी को ट्वीट कर प्रियंका की सभा कराने की सिफारिश की गई है। ट्वीट वायरल होने से भाजपा की ओर से भी साजिश किए जाने की बात कही जा रही है। जिसके लिए डॉ. कफील को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
रेप का भी दर्ज हुआ था केस
डॉ. कफील खान पर रेप का भी केस दर्ज हुआ था। आरोप था कि नौकरी के नाम पर निजी नर्सिंग होम पर बुलाकर उन्होंने रेप किया। कोर्ट के आदेश पर इस मामले में थाने में केस दर्ज हुआ था। पुलिस ने इसमें फाइनल रिपोर्ट लगाकर उन्हें आरोप से बरी कर दिया है।
यह उठे सवाल
खरीद कमेटी का सदस्य होने पर भी क्यों नहीं दी सूचना
सरकारी ड्यूटी के बीच प्राइवेट प्रेक्टिस को कैसे मिलता है समय
खुद ऑक्सीजन सिलेंडर लाने की जगह जिम्मेदारों को क्यों नहीं बताया
एक बच्चे को गोद में लेकर अफसोस पर वार्ड में जिंदगी से लड़ रहे बच्चों को क्यों नहीं देखा
9 अगस्त की सीएम बैठक में बकाए की सूचना क्यों नहीं दी