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हंगामे से बीच में ही खत्म हो गई वकीलों की सभा

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वकीलों की बैठक में काफी हंगामा हुआ। - फोटो : Amar Ujala
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गोरखपुर।
तहसीलदार सदर कोर्ट के बहिष्कार को जारी रखने या खत्म करने को लेकर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट स्थित अधिवक्ता सभागार में आयोजित हुई अधिवक्ताओं की सभा में जमकर हंगामा हुआ। इस दौरान अधिवक्ता दो फाड़ में होकर कुछ तहसीलदार सदर सत्येंद्र सिंह के पक्ष में तो कुछ उनके खिलाफ खड़े हो गए। दोनों तरफ से आरोप, प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। यही नहीं एक पक्ष ने इस मामले में बार काउंसिल उत्तर प्रदेश को पत्र लिखने वाले मंत्री विनय चंद को ही बर्खास्त करने की मांग कर दी तो उनके समर्थकों ने इसे असंवैधानिक बताते हुए विरोध दर्ज कराया। एक, दूसरे के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई और सभा बीच में ही बिना किसी निर्णय के समाप्त करनी पड़ी।

जिला अधिवक्ता एसोसिएशन के अध्यक्ष रामकृष्ण पांडेय का कहना है कि तहसीलदार की पैरवी में बार काउंसिल को पत्र लिखने के लिए मंत्री विनय चंद ने साधारण सभा में खेद जताया है। तहसीलदार कोर्ट का बहिष्कार अभी जारी है। शनिवार को फिर साधारण सभा की बैठक बुलाई गई है। आगे की कार्रवाई को लेकर इस बैठक में ही फैसला होगा। उधर, एसोसिएशन के मंत्री विनय चंद का कहना है कि उन्होंने कोई खेद नहीं जताया है। अध्यक्ष भ्रष्टाचार में डूबे हैं। तहसीलदार कोर्ट के बहिष्कार मामले में अधिवक्ताओं में गुटबंदी हो गई थी। उन्होंने काउंसिल को पत्र लिखकर सिर्फ अपने लिए दिशा निर्देश मांगा था। यही नहीं बायलाज को दरकिनार करते हुए उनके कैंपस में मौजूद रहने के बाद भी साधारण सभा का संचालन संयुक्त मंत्री प्रशासन से कराया गया।
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बार काउंसिल दे चुका है बहिष्कार खत्म करने का निर्देश
जिला अधिवक्ता एसोसिएशन के मंत्री विनय चंद के पत्र पर बार काउंसिल उत्तर प्रदेश ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए तहसीलदार कोर्ट के विरोध को गलत बताया है। काउंसिल ने एसोसिएशन के अध्यक्ष रामकृष्ण पांडेय को तत्काल तहसीलदार के कोर्ट का बहिष्कार खत्म करने का निर्देश दिया है। उन्होंने निर्देश की कॉपी डीएम को भी भेजी है। काउंसिल का कहना है कि एसोसिएशन को अगर तहसीलदार से कोई शिकायत है तो वे उसकी सूचना काउंसिल को दें, वह उनकी सभी मांगों पर विचार करेगा। मगर पहले तहसीलदार के कोर्ट को बहिष्कार खत्म करें।
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