बारिश की रफ्तार कम होने के बावजूद शहर के विभिन्न इलाके जलमग्न हैं। स्थिति यह है कि इंजीनियरिंग कॉलेज के पास गोरखपुर-देवरिया नेशनल हाइवे भी पानी में डूब गया है। वहीं बारिश से सेंट एंड्रयूज कॉलेज की दीवार भी ढह गई। इससे थोड़ी देर आवाजाही बाधित रही। इसे हटाने के बाद यातायात बहाल किया गया।
शनिवार शाम से बारिश लगातार जारी है। कभी मूसलाधार तो कभी रुक-रुककर। इससे रुस्तमपुर, चिल्मापुर, बगहा बाबा मंदिर रोड, भरवलिया, इंजीनियरिंग कॉलेज रोड, भेड़ियागढ़, रसूलपुर, आजाद नगर पूर्वी, तारामंडल रोड की सर्विस लेन, सिद्धार्थनगर, बुद्धनगर, दाउदपुर समेत कई इलाकों में पानी में डूबे हैं। इससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूली बच्चों को हो रही है। हालांकि नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि जलभराव वाले इलाके से पानी निकालने के लिए पंपसेट लगाए गए हैं।
सड़कों पर बने गड्ढे बनी मुसीबत
बारिश से विभिन्न इलाकों में सड़कों पर पानी भर गया है। इससे तारकोल की बनी सड़कें पूरी तरह उखड़ गई हैं। सड़क पर बने गड्ढों का पानी के कारण पता ही नहीं चल रहा है। इससे इन सड़कोें पर दुपहिया वाहन चलाना ही नहीं पैदल चलना भी खतरनाक हो गया है।
नाला न होना लोगों के लिए बनी मुसीबत
गोरखपुर-देवरिया नेशनल हाइवे पर जलभराव दूर करने के लिए 16.05 करोड़ की लागत से सिंघरिया से तुर्रा नाला तक 2014 में ही नाला स्वीकृत हुआ था, पहली किस्त में 6.42 करोड़ और दूसरी किस्त में 6.50 करोड़ रुपये भी जारी हुए, लेकिन तकनीकी खामियां बताते हुए इसका निर्माण रोक दिया गया। इससे फिर से इस इलाके में जलभराव की समस्या हो रही है।
नदियों का जलस्तर बढ़ा, रेग्यूलेटर के गेट हुए बंद
नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया है कि इसका पानी शहर में आने लगा है। ऐसे में नगर निगम ने डोमिनगढ़ और बसियाडीह रेग्यूलेटर के गेट बंद कर पंपिंग स्टेशन स्टार्ट कर दिया है। अगर नदियों का जलस्तर ऐसे ही बढ़ता रहा तो बाकी अन्य रेग्यूलेटर को भी बंद करने की नौबत आ जाएगी। शहर एक कटोरे के रूप में है। नदी के पानी को शहर में आने से रोकने के लिए बांध बना हुआ है। जब नदी का जलस्तर कम रहता है तो शहर का पानी खुद ब खुद नदी में जाता रहता है, लेकिन जलस्तर बढ़ने पर रेग्यूलेटर के गेट बंद कर पंपिंग स्टेशन स्टार्ट कर दिया जाता है। मंगलवार को ऐसी नौबत आ गई। नदी का पानी शहर की ओर आने लगा। इसके बाद डोमिनगढ़ और बसियाडीह रेग्यूलेटर के गेट बंद कर दिए गए। नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी रबीश चंद्र ने बताया कि अगर नदी का जलस्तर बढ़ने की रफ्तार यही रही तो जल्द ही अन्य रेग्यूलेटर के गेट भी बंद करने की नौबत आ जाएगी।