गोरखपुर।
ट्रेनों में सफर करने पर लगने वाले झटकों से जल्द ही मुक्ति मिल जाएगी। रेलवे ने वर्ष 2018 में सभी मेल, एक्सप्रेस व प्रीमियम ट्रेनों में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस लिंक हॉफमैन बुश (एलएचबी) कोच लगाने का फैसला किया है। मार्च 2018 से परंपरागत बोगियों इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) का निर्माण बंद हो जाएगा और सिर्फ उच्च तकनीकी वाले एलएचबी कोच ही बनेंगे।
यांत्रिक कारखाने का निरीक्षण करने के बाद पत्रकारों से मुखातिब रेलवे बोर्ड के रोलिंग व स्टॉक सदस्य रवींद्र गुप्ता ने बताया कि ट्रेन में सभी श्रेणी के यात्रियों का सफर अगले साल से आरामदायक हो जाएगा। बेहतर सफाई, बायो टॉयलेट, वॉश वेसिन, आरओ का पानी आदि सुविधाएं सभी ट्रेनों में मिलेंगी। उन्होेंने बताया कि अभी 500 एलएचबी कोच बनाए जा रहे हैं, मगर इस वर्ष हम 1800 से 1900 एलएचबी कोच तैयार करेंगे और अगले साल से 4000 कोच बनाए जाएंगे। इन कोच के ट्रेन में लगने से साधारण श्रेणी में सफर करने वाले मुसाफिर भी बेहतर महसूस करेंगे।
पूर्वोत्तर रेलवे के यांत्रिक कारखाने के कार्यों की तारीफ करते हुए कहा कि इस कारखाने में 1200 से 1400 कोच के मेंटेनेंस की क्षमता है। इसे और भी बढ़ाने के लिए अधिकारियों से सुझाव मांगे गए हैं। ऐसे में ट्रेनों में कोच बढ़ाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। ट्रेनों में कॉकरोच और चूहों के बढ़ते आतंक पर कहा कि पेस्ट एंड कंट्रोल से इसका निस्तारण हो रहा है। शिकायतें काफी कम हुई हैं। कारखाने में कर्मचारियों की घटती संख्या पर कहा कि अब मशीनीकरण का युग है। मुद्दा उठाने वाले मजदूर संगठनों को भी इसे समझना चाहिए।
कारखाना में कूड़े के ढेर हटाने का निर्देश
रेलवे बोर्ड के रोलिंग व स्टॉक सदस्य रवींद्र गुप्ता ने यांत्रिक कारखाने का निरीक्षण किया। उन्होंने कारखाने में कूड़े के ढेर को देख नाराजगी जताई और सफाई व्यवस्था और बेहतर बनाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया। निरीक्षण के दौरान मुख्य यांत्रिक इंजीनियर सहित विभाग के अधिकारी मौजूद थे।