गोरखपुर।
पॉलीथिन पर प्रतिबंध के बाद भी गीडा की तीन फैक्ट्रियों के बिजली, पानी कनेक्शन नहीं काटे जा सके। इस पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों ने कड़ी नाराजगी जताई है। बोर्ड ने कहा है कि तीन डीएम बदल गए, फिर भी फैक्ट्रियों की बिजली नहीं काटी जा सकी। यह बड़ी लापरवाही है। अब नगर निगम और बोर्ड तीनों फैक्ट्रियों को सील करने की तैयारी में है।
पॉलीथिन पर प्रतिबंध है। इसका हवाला देकर ही उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तीन प्लास्टिक फैक्ट्रियों की बिजली काटने के आदेश दिए थे। डीएम के माध्यम से आदेश की कॉपी बिजली विभाग के अफसरों को भेजी गई, लेकिन गीडा के सेक्टर-13 की मैसर्स पूर्वांचल खादी ग्रामोद्योग एवं कल्याण समिति, मैैसर्स श्वेता इंडस्ट्री और मैसर्स एनबी इंडस्ट्री की बिजली-पानी नहीं काटी जा सकी। बोर्ड को डर है कि इन फैक्ट्रियों से पॉलीथिन का उत्पादन किया जा रहा है। ज्यादातर फैक्ट्रियां रात में चलती हैं। इसी वजह से गोरखपुर में पॉलीथिन की सप्लाई कम नहीं हो सकी है। थोक, फुटकर दुकानों पर प्रतिबंधित पॉलीथिन मिल रही हैं। यह मामला अगर सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में आया तो अवमानना की नोटिस मिलेगी। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एसबी सिंह ने बताया कि बिजली काटने का पत्र संबंधित विभाग को भेजा जा चुका है। भले ही फैक्ट्रियों में तालाबंदी हो लेकिन काम चल रहा है। इसकी पुख्ता रिपोर्ट मिली है। इसी वजह से फैक्ट्रियों को सील करने की तैयारी है। नोटिस देने और बिजली काटने की प्रक्रिया एक साल से चल रही है। इस दौरान गोरखपुर के तीन डीएम आए और चले भी गए लेकिन फैक्ट्रियों की बिजली नहीं काटी जा सकी।