गोरखपुर।
नबी-ए-पाक का फरमान है कि जिसका मैं मौला, अली भी उसके मौला। जिसका मैं आका, अली भी उसके आका। जिसका मैं रहबर, अली भी उसके रहबर। जिसका मैं मददगार, अली भी उसके मददगार। ये बातें नबी-ए-पाक के दामाद इस्लाम के चौथे खलीफा हजरत अली की यौमे शहादत पर दरगाह मुबारक खां शहीद मस्जिद में संगोष्ठी के दौरान मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी ने कहीं।
उन्होंने कहा कि नबी-ए-पाक ने फरमाया कि मैं इल्म का शहर हूं और अली उसके दरवाजा हैं। मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने हजरत अली की शान में कहा कि इल्म का गौहर आपके खानदान से निकला। हमें भी हजरत अली के नक्शेकदम पर चलने की पूरी कोशिश करनी चाहिए, तभी दुनिया व आखिरत का फायदा होगा।
इस मौके पर कुल शरीफ की रस्म हुई। हजरत अली की रूह को ईसाले सवाब किया गया। इसमें मदरसा फैजान-ए-मुबारक खां शहीद के बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान दरगाह के मुतवल्ली इकरार अहमद, मोहम्मद आजम, अली अकबर सिद्दीकी, माजिद अली, जमील अहमद, मो. शाहिद, नबी हुसैन, सालिम, अब्दुल हकीम, शहाबुद्दीन, महबूब आलम, अब्दुल राजिक, मोहम्मद शारिक, इशा मोहम्मद आदि मौजूद रहे।