गोरखपुर। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन के अध्यक्ष देवाशीष घोष ने कहा कि सरकार की नीतियों की वजह से बैंकिंग सेक्टर को नुकसान हो रहा है। जिस एनपीए को आधार बनाकर सरकार सरकारी बैंकों के विलय का प्रयास कर रही है, वह पूंजीपतियों की वजह से है।
शनिवार को शहर के एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में देवाशीष घोष ने कहा कि सरकार पूंजीपतियों को हजारों करोड़ का कर्ज दे देती है, लेकिन इनमें से कुछ खुद को दीवालिया घोषित कर देते हैं। इससे बैंकों का एनपीए बढ़ता है। बैंकिंग सेक्टर लंबे अरसे से जानबूझ कर अपने को दिवालिया घोषित करने वालों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने और एनपीए वाले बड़े खाताधारकों के नाम को सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार नहीं मान रही है। ऐसा करके सरकार निजीकरण की स्थिति पैदा कर रही है। निजी बैंक केवल अपने हित के लिए नीति तैयार करेंगे। अगर ऐसा हो जाता है तो छोटे और मझोले किसानों, व्यापारियों, उद्यमियों को लोन मिलना मुश्किल हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि बैंककर्मियों की स्थिति काफी दयनीय है। पांच साल से उन्हें नया वेतनमान नहीं दिया जा रहा है। एमडी स्तर के अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद 30-35 हजार रुपये पेंशन मिलती है। इसमें बदलाव होना चाहिए। रविवार को पूर्वी जोन की ओर से आयोजित सम्मेलन में इन मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। इस दौरान गिरिधर गोपाल और एनएन आवांग मौजूद रहे।