सिद्धार्थनगर। इटवा थाने से एके-47 राइफल गुम होने के मामले में जेल में बंद आरक्षी द्वारा लगातार बदले जा रहे बयान ने जांच टीमों को उलझा दिया है। सूत्रों की मानें तो पहली बार आरक्षी ने यह बताया था कि दो फरवरी की रात में असलहा मालखाने में जमा हुआ। दूसरी बार उसने इससे इन्कार करते हुए आरोपों का ठीकरा दूसरे आरक्षी पर फोड़ दिया, जिसे दूसरा आरक्षी इन्कार कर चुका है। दस दिन बाद भी जांच कर रही एसटीएफ समेत चारों टीमों को राइफल के संबंध में कोई सुराग नहीं मिला है। सूत्रों के अनुसार आशंका व्यक्त की जा रही है कि कहीं राइफल प्रोफेशनल अपराधी के हाथ तो नहीं लग गई, जिसने कई टुकड़ों में उसे दूसरे राज्यों में भेज दिया। फिलहाल अब तक पुलिस केवल अंधेरे में तीर चला रही है। ये हाल तब है जब जिले से लेकर लखनऊ तक के अधिकारी इस पर नजर रखे हुए हैं। 25 हजार तक का ईनाम भी घोषित किया जा चुका है। अब पुलिस जेल गए पांचों पुलिसकर्मियों का नार्को टेस्ट भी कराने की जुगत में है। एसपी डॉ. धर्मबीर सिंह ने बताया कि जल्द ही पुलिस के एके-47 को बरामद कर लेगी।
बिहार में कई टुकड़ों में मिली थी एके-47
पूर्णिया (बिहार) में बरामद एके 47 को तस्कर ने लक्जरी वाहन में कई टुकड़ों में फिट किया था। कड़ाई से पूछताछ के बाद आरोपियों ने यह बात स्वीकार की थी कि एके-47 के अलग-अलग हिस्सों को लग्जरी गाड़ियों के सीट बेल्ट, बोनट और एलॉय व्हील जैसी जगहों पर छिपाया था। ऐसे में इस आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है कि इटवा थाने से गुम हुई एके-47 राइफल टुकड़ों में बंटकर कहीं दूसरे राज्य या फिर दूसरे देश न चली गई। वहीं, बिहार पुलिस की मानें तो तीनों हथियार केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपने की तैयारी है। बता दें कि गिरफ्तार एक तस्कर सूरज गोरखपुर के पिपराइच का रहने वाला है।