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सीमा तक सड़क बनाने को रजिस्ट्री में आई तेजी

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सीमा पर सड़क निर्माण की कवायद हुई तेज
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अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। गश्त तेज करने के बाबत नेपाल सीमा तक सड़क बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण और रजिस्ट्री के काम में तेजी लाई गई है। सरहद की सुरक्षा व निगरानी के लिए 2013 में स्वीकृत कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए करीब 167.55 हेक्टेअर जमीन की आवश्यकता जताई गई थी। प्रस्ताव में कहा गया था कि नेपाल सीमा पर 67 किमी सड़क निर्माण कार्य होना है। उधर, कार्ययोजना स्वीकृत हुए पांच साल से अधिक समय बीत गए और अब तक कार्यदायी संस्था सिर्फ साढ़े सात किमी सड़क ही बना सकी है। इस बीच सड़क निर्माण के काम तेजी लाने के लिए अधिग्रहीत जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।
बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण हो जाने से सुरक्षा एजेंसियों को गश्त में सहूलियत होगी। इंडो-नेपाल सीमा की सुरक्षा, आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए एसएसबी लगातार पेट्रोलिंग के लिए सीमा पर 67 किमी सड़क निर्माण होना है। सीमा तक सड़क निर्माण के लिए किसानों की भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया में पूर्व में तब अड़चन पैदा हो गया था जब किसान सर्किल रेट से अधिक कीमत की मांग करने लगे। बाद में सरकार किसानों की शर्तें मानकर मांग के अनुसार कीमत देने को तैयार हो गई। इसके बाद अधिग्रहण से प्रभावित किसानों ने जमीन की रजिस्ट्री में सहयोग करना शुरू किया। यह जानकारी देते हुए इंडो-नेपाल बार्डर सड़क संगठन के अवर अभियंता ने बताया कि बीते साल 30 मार्च तक विभाग 865 किसानों से मात्र 40.42 हेक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री करा सका था। इसके बाद 31 दिसंबर तक 1525 किसानों की करीब 51.65 हेक्टेयर भूमि की रजिस्ट्री कराई गई। इस माह में 7 से 14 जनवरी के बीच भी 78 किसानों की जमीन की रजिस्ट्री कराई गई है। अवर अभियंता ने बताया कि जैसे जैसे अधिग्रहीत जमीन की रजिस्ट्री होती जा रही है, सड़क निर्माण काम भी किया जा रहा है। इन दिनों कास्तखैरा व जोगियाबारी के बीच सड़क निर्माण के लिए मिट्टी भराई का काम चल रहा है। फसल कट जाने के बाद निर्माण कार्य में और तेजी आएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि सड़क निर्माण में अब अवरोध नहीं पैदा होगा। किसान भी भूमि के रजिस्ट्री कराने के लिए सक्रिय हो चुके हैं।
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अवर अभियंता सतीश कुमार गौतम ने बताया कि ठूठीबारी से बरगदवां तक करीब साढ़े सात किमी सड़क निर्माण कार्य पूरा करा लिया गया है। आगे जैसे-जैसे जमीन मिलती जाएगी, सड़क निर्माण भी होता जाएगा। कार्य में तेजी लाने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। सड़क बन जाने से सुरक्षा कर्मियों को बार्डर पर गश्त में काफी सहूलियत होगी।
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