गोरखपुर। शिक्षक नियुक्ति में लगातार सामने आ रहे फर्जीवाड़े से निपटने के लिए शासन ने 2010 के बाद से अब तक हुई शिक्षक नियुक्तियों की जांच कराने का फैसला लिया है। जांच प्रभावित न हो, इसके लिए जिला प्रशासन, पुलिस और शिक्षा विभाग से अधिकारियों की विशेष टीम गठित होगी। एक महीने के भीतर ही कमेटी को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।
शासन का निर्देश मिलने के बाद से बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों में खलबली मच गई है। जांच समिति के अध्यक्ष एडीएम सिटी होंगे। एडी बेसिक गोरखपुर-बस्ती मंडल समिति के सदस्य होंगे। जांच में फर्जी शिक्षकों की असलियत का पता लगाने के लिए समिति में पुलिस विभाग के प्रतिनिधि के रूप में एक डिप्टी एसपी को भी शामिल किया जाएगा।
अन्य जिलों में भी प्रशासन और पुलिस के अधिकारी अलग-अलग होंगे, लेकिन शिक्षा विभाग की तरफ से एडी बेसिक को ही शामिल होने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। शिक्षकों की नियुक्ति स्वीकृत पदों से अधिक तो नहीं हुई है, यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु होगा। इसके साथ ही सभी शिक्षकों के प्रपत्रों की भी जांच कराई जाएगी।
467 शिक्षकों पर है शिक्षकों पर है आरोप
जिले के अलग-अलग विकास खंडों में तैनात 467 शिक्षकों पर फर्जी अंकपत्र के सहारे नौकरी करने का आरोप है। इन शिक्षकों ने पैन और इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) भरने की भी गलत जानकारी दी है। बीएसए के मुताबिक जांच के दौरान 19 शिक्षकों के दस्तावेज गलत मिले हैं। इनकी बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा रही है। 13 शिक्षकों के नाम शासन को भेजे जा चुके हैं। जल्द ही छह और नाम भेजे जाएंगे। छह शिक्षकों को नोटिस देकर जवाब तलब किया गया है।
इन शिक्षकों के खिलाफ चल रही कार्रवाई
महेश कुमार, धर्मेंद्र, श्रीराम, अशोक, हृदय नारायण सिंह, राम सुंदर, राजेश कुमार, शब्बीर, अजय कुमार सिंह, अमित श्रीवास्तव, अमृतेश कुमार, प्रमोद कुमार वर्मा, पंकज समेत छह और शिक्षक शामिल हैं।