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नकल : प्रिंसिपल, केंद्र व्यवस्थापक, सॉल्वर गिरफ्तार

Sun, 18 Feb 2018 01:25 AM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
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एसपी चारू निगम ने नकल माफिया के भंडाफोड़ की जानकारी दी। - फोटो : Amar Ujala
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एक दिन पहले पुलिस के हत्थे चढ़े तीन लोगों के जरिए पुलिस ने यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में नकल के बड़े खेल का भंडाफोड़ किया है। गिरफ्तर में आए तीन लोगों में उरुवा के राजकली सिंह इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य भारत भूषण सिंह, केंद्र व्यवस्थापक पंकज सिंह और सॉल्वर सुभाष सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक इनके कब्जे से बड़ी मात्रा में उत्तर पुस्तिकाएं और प्रश्नपत्र बरामद हुए हैं।
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शनिवार देर रात एसपी चारु निगम ने नकल माफिया के रहस्य से परदा हटाते हुए मीडिया को बताया कि इनके कब्जे से एक रिवाल्वर, पांच कारतूस भी मिले हैं। पुलिस ने धोखाधड़ी, आईटी एक्ट सहित आठ अन्य गंभीर धाराओं में सात नामजद, सरकारी कर्मचारी सहित कई अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामले में विश्वजीत सिंह, कैलाश सिंह और अखिलेश चौधरी फरार हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। पता चला है कि बसपा की राजनीति में सक्रिय विश्वजीत पूर्व जिला पंचायत सदस्य, गोरखपुर विश्वविद्यालय का पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष है। नकल के खेल में दो लेखपाल ज्ञानेश्वर यादव और अजय पाठक की संलिप्तता के संकेत भी मिले हैं, जबकि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के कुछ कर्मचारी भी पुलिस के निशाने पर हैं।

बाहर रखी कॉपियों पर लिखा जाता था उत्तर
एसपी ने बताया कि सॉल्वर सुभाष सिंह प्रश्नपत्र की फोटो मोबाइल फोन से खींचकर व्हाट्स एप के जरिए कॉलेज के पास के मेडिकल स्टोर संचालक कैलाश सिंह को भेजता था। इसके बाद पहले से बाहर मौजूद उत्तर पुस्तिकाओं पर सही उत्तर लिखे जाते थे। परीक्षा पूरी होने तक यही उत्तर पुस्तिकाएं केंद्र पर जाम हो जाती थीं। प्रश्नपत्र हल करने के लिए कई सॉल्वर लगाए जाते थे।
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स्ट्रांग रूम में सीसीटीवी कैमरा नहीं
एसपी के मुताबिक जहां प्रश्नपत्र खुलता है और उत्तर पुस्तिका जमा की जाती है, उस स्ट्रांग रूम में सीसीटीवी कैमरे नहीं थे। छानबीन में पता चला कि ऐसा जानबूझकर किया गया है। कैमरे की अनदेखी के बावजूद कार्रवाई न होना शिक्षा विभाग के लोगों की मिलीभगत का संकेत दे रहा है। विद्यालय में 13 कैमरे लगे हैं लेकिन परीक्षा के बीच ज्यादातर काम नहीं करते।

550 विद्यार्थी दे रहे थे पेपर
पुलिस की सर्च के दौरान उरुवा के राजकली सिंह इंटर कॉलेज में 550 विद्यार्थी पेपर दे रहे थे। इनमें 240 इंटरमीडिएट के थे। इस कॉलेज में अमरपुर के मारकंडेय विद्यालय का केंद्र बनाया गया है।

600 उत्तर पुस्तिकाएं मिलीं
एसपी ने बताया कि नकल माफिया के कब्जे से इस सत्र की 600 बिना लिखी उत्तर पुस्तिकाएं मिली हैं। 2013, 2014 की 69 कॉपियां भी मिली हैं। 2018, 2017, 2016 के भौतिकी, सामान्य हिंदी और मैथ्स के 11 प्रश्नपत्र बरामद हुए हैं। प्रश्नो के हल में मददगार बनने वाला कागज भी मिला है।

नकली मार्कशीट बनाने का भी शक
माध्यमिक शिक्षा परिषद की तरफ से जारी हाईस्कूल, इंटर की 69 मार्क्सशीट मिली हैं। इंटर के अलग-अलग वर्षों के 11 सर्टिफिकेट मिले हैं। पुलिस को शक है कि ये लोग नकली मार्क्सशीट बनाने का धंधा भी करते थे।

डायरी में दर्ज है लेनदेन
एसपी ने बताया कि कॉलेज से एक पॉकेट डायरी मिली है। इसमें तमाम विद्यार्थियों के नाम, बैंक अकाउंट नंबर लिखे हैं। अनुमान है कि नकल कराने के एवज में वसूली जाने वाली राशि का कुछ ब्यौरा डायरी में है। कई विद्यार्थियों के नाम के आगे 10 से 15 हजार रुपये तक की अलग-अलग रकम दर्ज है। इन विद्यार्थियों को भी पूछताछ के दायरे में ले सकते हैं।

कॉल रिकॉर्डिंग बनी मददगार, छह फोन जब्त
पुलिस ने सर्विलांस की मदद से गिरोह के सदस्यों को पकड़ा। एसपी का दावा है कि नकल के उद्देश्य से प्रबंधक, प्रधानाचार्य, केंद्राध्यक्ष, लेखपाल और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के बीच जो भी बातें हुईं, सभी रिकार्ड किए गए हैं। व्हाट्सएप से भेजे गए प्रश्नपत्र के प्रमाण और छह मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं।

दस साल से खेल का संदेह
उरुवा क्षेत्र में नकल माफिया के संगठित गिरोह के 10 साल से सक्रिय होने की गुप्त रिपोर्ट पर एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने एसपी दक्षिणी ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी, एसपी चारु निगम और सीओ क्राइम प्रवीण सिंह की टीमें सक्रिय की थीं। थानाध्यक्ष उरुवा प्रमोद त्रिपाठी, थानाध्यक्ष खजनी आशुतोष सिंह और प्रभारी स्वॉट रवींद्र यादव ने नेटवर्किंग से नकल का मनमाना खेल करने वालों तक पहुंचाया।

- परीक्षा को लेकर बेहद गंभीर मामला सामने आया है। विभागीय जांच भी कराई जाएगी। शिक्षा विभाग के जिन अफसर या कर्मचारियों का नाम सामने आया, उसे निलंबित किया जाएगा। पुलिस की जांच में शिक्षा विभाग पूरा सहयोग देगा।
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- ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह भदौरिया, जिला विद्यालय निरीक्षक
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